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रात के अंधेरे में चॉदनी कही खो गई

4.0
450

फुटपाथ पर सोये लोगो की भूख भी सो गई नये साल का शोर हर तरफ ,मगर गरीबी बिना घुघंरु की पायल सी हो गई कपडो़ के छेद में इज्जत बचाती रही , मानवता ना जाने कब तार -तार हो गई पनीर को देख कर मुंह बनाते रहे दो...

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लेखक के बारे में
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सीमा मेहता
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Satyendra Kumar
    20 मई 2022
    चांदनी रात में ना दिल को बेकरार कर सुबह जरूर आएगी सुबह का इंतजार कर
  • author
    Rajvishal Prajapati
    13 अप्रैल 2020
    सत्य विचार, बड़ा खूब लिखा ।
  • author
    RAMESHWAR KUMAR
    30 मई 2019
    Sahi formate den apni rachna ko
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    Satyendra Kumar
    20 मई 2022
    चांदनी रात में ना दिल को बेकरार कर सुबह जरूर आएगी सुबह का इंतजार कर
  • author
    Rajvishal Prajapati
    13 अप्रैल 2020
    सत्य विचार, बड़ा खूब लिखा ।
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    RAMESHWAR KUMAR
    30 मई 2019
    Sahi formate den apni rachna ko