pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

પ્રકરણ

3.7
395

ऐक ऐसी दुनीया में जाना चाहती हु. जही  बस में हु और हौ खुशी. ना हो जहा गम का नाम और ना हो नफ़रत का कौइ पता हो जो ऐसी दुनिया तो कोई मुझे दे बता जहा ना हो कोई उदास बस हो खुशया ही पास जहा ना हो ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Aarti
    09 दिसम्बर 2022
    बहुत बेहतरीन था
  • author
    विनीता मिश्रा
    25 अक्टूबर 2019
    बहुत सुंदर
  • author
    BHUSHAN KHARE
    17 मई 2018
    बहुत अच्छी रचना
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Aarti
    09 दिसम्बर 2022
    बहुत बेहतरीन था
  • author
    विनीता मिश्रा
    25 अक्टूबर 2019
    बहुत सुंदर
  • author
    BHUSHAN KHARE
    17 मई 2018
    बहुत अच्छी रचना