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पुत्रवती भव

4.1
18528

विवाह के हसीन सपनों से सजी प्रज्ञा ,जैसे ही ससुराल पहुंची एक आशीर्वाद कानों में गूंजा, 'पुत्रवती भव'। साथ ही यह वाक्य , -जो अरमान मेरी बड़ी बहू न पूरा कर सकी, वह मेरी छोटी बहू जरूर पूरा करेगी। कौन सा ...

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समीक्षा
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  • author
    chavda jitu
    01 मई 2019
    bahut hi Dard Bhari aur samaaj ki asliyat batati hui kahani.fir bhi mujhe bahut krodh aaya .aise logo ke prati jo garbh me beti hone par khud ki patni-bahu ke saath aaisa durvyavahar karte hai.kyuki beta ya beti hona sirf aur sirf purush pe Aadhar rakhata hai.
  • author
    Sanjay Kumar
    20 जून 2019
    अगर ये यथार्थ है तो प्रज्ञा के पास ऐसे दरिंदों पर नकेल कसने के लिए कानूनी हथियार हैं । अगर नहीं है तो भी आज हमारे देश मे ऐसी घटनाएं हो रही है और अनेकों प्रज्ञा चुप रहती है , उन्हें जागना होगा तभी इन दरिंदों पर कारवाई संभव है ।
  • author
    Umesh Kumar
    12 अप्रैल 2020
    कहानी अच्छी है। आज का समाज ऐसा ही है। स्वयं की ग़लती दूसरे के सिर। आज की तकनीकी ज्ञान का हवाला देकर शिशु के लिंग का जब निलेश पता कर सकता है तो उसी तकनीकी ज्ञान से अपने क्रोमोसोम का भी पता किया जा सकता था, जो उसने नहीं किया। कहानी अधर में है, यही कहानी की जान है।
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    chavda jitu
    01 मई 2019
    bahut hi Dard Bhari aur samaaj ki asliyat batati hui kahani.fir bhi mujhe bahut krodh aaya .aise logo ke prati jo garbh me beti hone par khud ki patni-bahu ke saath aaisa durvyavahar karte hai.kyuki beta ya beti hona sirf aur sirf purush pe Aadhar rakhata hai.
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    Sanjay Kumar
    20 जून 2019
    अगर ये यथार्थ है तो प्रज्ञा के पास ऐसे दरिंदों पर नकेल कसने के लिए कानूनी हथियार हैं । अगर नहीं है तो भी आज हमारे देश मे ऐसी घटनाएं हो रही है और अनेकों प्रज्ञा चुप रहती है , उन्हें जागना होगा तभी इन दरिंदों पर कारवाई संभव है ।
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    Umesh Kumar
    12 अप्रैल 2020
    कहानी अच्छी है। आज का समाज ऐसा ही है। स्वयं की ग़लती दूसरे के सिर। आज की तकनीकी ज्ञान का हवाला देकर शिशु के लिंग का जब निलेश पता कर सकता है तो उसी तकनीकी ज्ञान से अपने क्रोमोसोम का भी पता किया जा सकता था, जो उसने नहीं किया। कहानी अधर में है, यही कहानी की जान है।