pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

पुस्तक समीक्षा!

5
3

मेरी दोस्ती हो गई विद्या से! मैं शाला सह पाठी था,! मेरा नाम उस वक़्त विवेक था! विवेक!!!!!! क्या तुम विद्या से कभी मिले हों! विवेक!!!!!!! मैं विद्या से ग्रंथालय में मिला हुं, जहां मेरी जैसी पुस्तक ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
Kiran Pal

मैं किरण सोनार हाउस वाइफ हु और मुझे दो बच्चे बेटी है मैं घर गरसती में ख़ुश हु साहित्य में प्रेरणा के पहलु लिखना चाहतीं हु

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sunita Jha
    06 जुलाई 2024
    बेहतरीन रचना है आपकी।
  • author
    Rakesh Chaurasia
    06 जुलाई 2024
    बहुत सुंदर रचना लिखी है आपने।
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sunita Jha
    06 जुलाई 2024
    बेहतरीन रचना है आपकी।
  • author
    Rakesh Chaurasia
    06 जुलाई 2024
    बहुत सुंदर रचना लिखी है आपने।