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पूर्वाभास

4.2
15774

सरसराती हवा और तेज़ बारिश में जहाँ सब अपने अपने घरों में घुस गए थे.. मैं इसी बगीचे में बैठ के तुम्हारे आने का इंतेज़ार कर रही थी.. उस शाम तुम ने मिलने का वादा किया था..उस वक़्त मौसम अपने पूरे मिजाज़ में...

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लेखक के बारे में
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निधि श्री
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Pankaj Singh
    11 ಮಾರ್ಚ್ 2017
    एक कहानीकार की जीत तभी हो सकती है जब पढने वाला उस कहानी में डूब जाये और खुद को उस कहानी का हिस्सा समझे और इस कहानी को पढ़ कर मुझे ऐसा ही महसूस हुआ अच्छी लेखनी.
  • author
    अंकिता शाम्भवी
    10 ಮಾರ್ಚ್ 2017
    उम्दा.. यूँहीं लिखती रहें.. ☺
  • author
    07 ಫೆಬ್ರವರಿ 2019
    ऐसा होता है मैम
  • author
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    Pankaj Singh
    11 ಮಾರ್ಚ್ 2017
    एक कहानीकार की जीत तभी हो सकती है जब पढने वाला उस कहानी में डूब जाये और खुद को उस कहानी का हिस्सा समझे और इस कहानी को पढ़ कर मुझे ऐसा ही महसूस हुआ अच्छी लेखनी.
  • author
    अंकिता शाम्भवी
    10 ಮಾರ್ಚ್ 2017
    उम्दा.. यूँहीं लिखती रहें.. ☺
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    07 ಫೆಬ್ರವರಿ 2019
    ऐसा होता है मैम