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पुरूष

2.8
756

पुरूष स्त्री और पुरूष की अलग से विवेचना की जाये तो किसी को अलग करना याने एकाकी करना है पुरूष भी उतना ही महत्वपूर्ण किरदार है जीवन का जितनी की स्त्री एक के वगैर एक की कल्पना एक टूटे ...

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लेखक के बारे में
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Richa Rai
    30 अप्रैल 2017
    Bahut badhiya
  • author
    बहिष्कृत "आर्य"
    03 अप्रैल 2018
    कहानी में लेखक के भाव पात्रों में चरितार्थ होने चाहिए, न कि लेखन में अपनी राय लिखनी चाहिए...
  • author
    SHIVAM Yadav
    11 मई 2017
    truthful
  • author
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Richa Rai
    30 अप्रैल 2017
    Bahut badhiya
  • author
    बहिष्कृत "आर्य"
    03 अप्रैल 2018
    कहानी में लेखक के भाव पात्रों में चरितार्थ होने चाहिए, न कि लेखन में अपनी राय लिखनी चाहिए...
  • author
    SHIVAM Yadav
    11 मई 2017
    truthful