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प्रियतम

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प्रिय ! कहाँ हो तुम ? तुम हो कहाँ कहीं नजर नहीं आते कब से तुम्हारी राह देखती हूँ। तुम बिन ये तट सूना है बट की यह शाख अधूरी है तुम्हारी ये बांसुरी होठों से छूने को व्याकुल है मेरी ये आँखे तुम्हें ...

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लेखक के बारे में
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अनीता चौधरी
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    17 अक्टूबर 2015
    "खत़" जैसे शब्द का प्रयोग । राष्ट्र भाषा ज्ञान का अभाव दर्शाती सारहीन व अप्रासांगिक कविता ।
  • author
    Naveen Pawar
    22 जनवरी 2022
    आदरणीया महोदया जी आपकी कवितावली बहुत खुबसुरत होती है उपयुक्तता लफ्ज दिल की गहराई मे अमिट छाप छोड जाते है
  • author
    10 फ़रवरी 2019
    nice mam
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    Satyendra Kumar Upadhyay
    17 अक्टूबर 2015
    "खत़" जैसे शब्द का प्रयोग । राष्ट्र भाषा ज्ञान का अभाव दर्शाती सारहीन व अप्रासांगिक कविता ।
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    Naveen Pawar
    22 जनवरी 2022
    आदरणीया महोदया जी आपकी कवितावली बहुत खुबसुरत होती है उपयुक्तता लफ्ज दिल की गहराई मे अमिट छाप छोड जाते है
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    10 फ़रवरी 2019
    nice mam