pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

Priya Sharma

5
202

"यू ही नहीं थे वो मुलाकातों के सिलसिले" कुछ उसने भी मुझे परखा था, कुछ मैंने भी उसे जाना था , फिर बात हुई जज्बातों की..... कि उसने भी मुझे अपना माना था, कुछ मैंने भी खुद को उसे सौंपा था.. फिर ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
Priya Sharma
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    24 नवम्बर 2019
    कितनी सुंदर रचना है आपकी कितना दर्द छिपा है इसमें।? घायल की गति घायल जाने, जो कोई घायल होय। पीर पराई वो क्या समझे, जो बेपीर न रोय। (समीक्षा के दौरान स्व रचित) इतनी भाव पूर्ण रचना के लिए बहुत बहुत बधाई।
  • author
    Nadeem
    20 दिसम्बर 2019
    एक मार्मिक कथा
  • author
    Chandrabali
    23 नवम्बर 2019
    very nice..
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    24 नवम्बर 2019
    कितनी सुंदर रचना है आपकी कितना दर्द छिपा है इसमें।? घायल की गति घायल जाने, जो कोई घायल होय। पीर पराई वो क्या समझे, जो बेपीर न रोय। (समीक्षा के दौरान स्व रचित) इतनी भाव पूर्ण रचना के लिए बहुत बहुत बधाई।
  • author
    Nadeem
    20 दिसम्बर 2019
    एक मार्मिक कथा
  • author
    Chandrabali
    23 नवम्बर 2019
    very nice..