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प्रेमी प्रेमिका संवाद...

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प्रेमी.... अधूरा था अधूरा हूं अधूरा ही सही होगा हमारा प्रेम का चक्कर कभी पूरा नही होगा लगाती हो तुम चश्मा पहन के माक्स भी अपना खुदा भी रोज कहता है चांद भी छुपा होगा ताजमहल के जैसा तेरा मुखड़ा भी...

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लेखक के बारे में

कलम कहे बहुत कुछ...✍️🌱🌹

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Harsh Shukla 🇮🇳(crazy)
    28 नवम्बर 2020
    वाह भाई, क्या खूब गज़ब की लाइनें , बेहतरीन रचना 👌👌👍💥😊🥀👌
  • author
    श्वेता विजय mishra
    29 नवम्बर 2020
    वाह बहुत बहुत खूब लिखा👍👍👍
  • author
    Aayra
    29 नवम्बर 2020
    awesome lines ji
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  • author
    Harsh Shukla 🇮🇳(crazy)
    28 नवम्बर 2020
    वाह भाई, क्या खूब गज़ब की लाइनें , बेहतरीन रचना 👌👌👍💥😊🥀👌
  • author
    श्वेता विजय mishra
    29 नवम्बर 2020
    वाह बहुत बहुत खूब लिखा👍👍👍
  • author
    Aayra
    29 नवम्बर 2020
    awesome lines ji