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'प्रकृति से सीखो'

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फूलों से सीखो तुम मुस्कुराना काँटो से सीखो साथ निभाना नदियों से सीखो चलते जाना झरनों से सीखो गुनगुनाना चिडियों से सीखो चहचहाना कोयल से सीखो गीत गाना लताओं से सीखो नत जाना चट्टानों से सीखो डट जाना ...

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लेखक के बारे में
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शशि शर्मा

मैं एक सामान्य गृहिणी हूँ। जब भी मन में भाव उमड़ते घुमड़ते हैं तो उन्हें शब्दों में ढाल लेखनी से पन्ने पर उतार देती हूँ। जो भी और जितना भी लिख पाती हूँ बस दिल से लिखती हूँ💕💞 दुख हो या सुख आयें जिंदगी जिंदादिली से जिया करती हूँ😄 ☺मुस्कान मेरी पहचान, सादगी मेरी शान🌺 आप सब का यहाँ दिल से स्वागत🙏💐 रचनाकर्म अच्छा लगे तो अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजिएगा✍ न भाये तो औपचारिकता न कीजिएगा😊 जहाँ भी त्रुटि नजर आये मार्गदर्शन अवश्य कीजिये🙏 आजीवन सीखना ही है सुरूर हमारा✍ किताबों से नाता गहरा हुजूर हमारा📖 लिखते हैं पर लिखना अभी आता नहीं- प्रशिक्षु बने रहें आजीवन ये गुरुर हमारा🙏☺ शशि शर्मा 'खुशी' हनुमानगढ़ जंक्शन राजस्थान

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Ravindra N.Pahalwam
    08 अक्टूबर 2018
    वाह / पूरा जीवन सीखने के लिए है / सरल शब्दों में गम्भीर बात / जब हम प्रकृति से सीखेंगे तो पर्यावरण को खराब नहीं करेंगे...
  • author
    chitra gaur
    28 जून 2024
    प्रकृति से सच में कितना कुछ सीख सकते है हम।
  • author
    Yashwant Kumar Garg
    04 सितम्बर 2022
    प्रकृति से सीख लेने की बहुत ही बेहतरीन भाव प्रस्तुति🙏🏻🙏🏻
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    Ravindra N.Pahalwam
    08 अक्टूबर 2018
    वाह / पूरा जीवन सीखने के लिए है / सरल शब्दों में गम्भीर बात / जब हम प्रकृति से सीखेंगे तो पर्यावरण को खराब नहीं करेंगे...
  • author
    chitra gaur
    28 जून 2024
    प्रकृति से सच में कितना कुछ सीख सकते है हम।
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    Yashwant Kumar Garg
    04 सितम्बर 2022
    प्रकृति से सीख लेने की बहुत ही बेहतरीन भाव प्रस्तुति🙏🏻🙏🏻