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प्रकृति के रंग. हमारे संग

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प्रकृति जब रंग बदलती है. संसार रंगीला हो जाता है फागुन में पलाश के खिलने पर चहुंओर अनल रंग छाता है। चैत्र में फसलों के पकते ही हर खेत सुनहला हो जाता है। ऐसा लगता जैसे प्रकृति का रंगों से अद्भुत नाता ...

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लेखक के बारे में
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Anuradha Mishra

मैं गृहिणी हूँ।लेखन में रुचि है।सामाजिक विषयों पर लेखन पसंद है।एक उपन्यास, हम कैदी जनम के, तथा एक कविता संग्रह अश्रुधारा. प्रकाशित हो चुका है। समाज सेवा में भी रुचि है अतः लायंस क्लब इंटरनेशनल में सदस्यता भी ले रखी है।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    आशा रानी शरण
    12 नवम्बर 2020
    वाह हिंदी के सारे महीनों को चैत बैसाख जेठ आषाढ़ सारे को अलग-अलग वर्णन किया आपने अपनी कॉपी रचना में बहुत सुंदर प्रस्तुति लाजवाब धन्यवाद नमस्कार अनुराधा जी। कृपया मेरी रचना भी पढ़ते रहिए गा।
  • author
    शैलजा (Sofiya)
    12 नवम्बर 2020
    बहुत खूब सूरत वर्णन किया आपने प्रकृति का 😊
  • author
    Balvindar singh Waraich
    12 नवम्बर 2020
    बहुत ही खूबसूरत
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    आशा रानी शरण
    12 नवम्बर 2020
    वाह हिंदी के सारे महीनों को चैत बैसाख जेठ आषाढ़ सारे को अलग-अलग वर्णन किया आपने अपनी कॉपी रचना में बहुत सुंदर प्रस्तुति लाजवाब धन्यवाद नमस्कार अनुराधा जी। कृपया मेरी रचना भी पढ़ते रहिए गा।
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    शैलजा (Sofiya)
    12 नवम्बर 2020
    बहुत खूब सूरत वर्णन किया आपने प्रकृति का 😊
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    Balvindar singh Waraich
    12 नवम्बर 2020
    बहुत ही खूबसूरत