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प्रभु तुम मेरे मन की जानो

4.4
1653

मैं अछूत हूँ, मंदिर में आने का मुझको अधिकार नहीं है। किंतु देवता यह न समझना, तुम पर मेरा प्यार नहीं है॥ प्यार असीम, अमिट है, फिर भी पास तुम्हारे आ न सकूँगी। यह अपनी छोटी सी पूजा, चरणों तक पहुँचा न...

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लेखक के बारे में

मूल नाम : सुभद्रा कुमारी चौहान जन्म : 16 अगस्त 1904, इलाहाबाद(उत्तर प्रदेश) देहावसान : 15 फरवरी 1948, जबलपुर(मध्य प्रदेश) भाषा : हिन्दी विधाएँ : कविता, कहानी सुभद्रा कुमारी चौहान एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं हिन्दी भाषा की एक सुप्रसिद्ध रचनाकार हैं, इनकी कविता झाँसी की रानी एक कालजयी रचना मानी जाती है। इनके सम्मान में भारत सरकार ने एक डाक टिकट जारी किया हुआ है, और साथ ही साथ भारतीय नवसेना ने अपने एक तट-रक्षक जहाज का नाम भी इनके नाम पर रखा है।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    11 अप्रैल 2022
    वंचित समाज की यह पीड़ा नितांत ही पीड़ाजनक है । सवर्ण व समर्थ लोगों को छुआ - छूत समाप्त करने के लिए दृढ़ता के साथ आगे आना चाहिए ।अत्यन्त ही हृदयस्पर्शी रचना । साधुवाद
  • author
    renu kapoor very innovative
    05 जुलाई 2022
    बहुत बढ़िया शब्द नहीं है इस को ब्यान करने के लिए धन्यवाद आपका
  • author
    Sonu K
    02 मई 2018
    यह सच आज भी गांवों में है
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    अरविन्द सिन्हा
    11 अप्रैल 2022
    वंचित समाज की यह पीड़ा नितांत ही पीड़ाजनक है । सवर्ण व समर्थ लोगों को छुआ - छूत समाप्त करने के लिए दृढ़ता के साथ आगे आना चाहिए ।अत्यन्त ही हृदयस्पर्शी रचना । साधुवाद
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    renu kapoor very innovative
    05 जुलाई 2022
    बहुत बढ़िया शब्द नहीं है इस को ब्यान करने के लिए धन्यवाद आपका
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    Sonu K
    02 मई 2018
    यह सच आज भी गांवों में है