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पूछते हो दर्द का क्यूँ सिलसिला हूँ

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पूछते हो दर्द का क्यूँ सिलसिला हूँ सुर्ख़ियों में आ गया मैं क्यूँ भला हूँ।1 जानने की चाह रखते हो सुखनवर कौन माटी का भला मैं भी गढ़ा हूँ।2 माँगने की तो कभी आदत नहीं थी पुंज बनकर रौशनी का बस जला हूँ।3 ...