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पीथल और पाथल – कन्हैयालाल सेठिया

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देशभग्तिप्रेणादय

पीथल और पाथल – कन्हैयालाल सेठिया अरे घास री रोटी ही जद बन बिलावड़ो ले भाग्यो। नान्हो सो अमरयो चीख पड्यो राणा रो सोयो दुख जाग्यो। हूं लड्यो घणो हूं सह्यो घणो मेवाड़ी मान बचावण नै, हूं पाछ नहीं राखी रण ...

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लेखक के बारे में
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Kuldeep Shekhawat Rajput

द्वन्द्व कहां तक पाला जाये युद्ध कहां तक टाला जाये तु वशंज है महाराणा का फेंक जहां तक भाला जाये

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    satveer singh gudha
    01 सितम्बर 2021
    राजस्थान की आन बान की रक्षा का उत्तम सन्देश। रचना को पढ़कर वीरता आजादी का जुनून जाग्रित हुआ है। राजस्थान के इतिहास की वीरता साहस रजपूती आन बान की सत्यता का प्रतीक है
  • author
    Maaya "Maaya"
    03 जुलाई 2020
    ऐसा लगता है कि ये कविता लिखते वक्त स्वयं मां सरस्वती कन्हैया लाल जी कलम पर विराजमान हुईं थीं।
  • author
    Girdharilal Seervi
    09 जनवरी 2021
    बहुत ही अच्छी कविता है।
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    satveer singh gudha
    01 सितम्बर 2021
    राजस्थान की आन बान की रक्षा का उत्तम सन्देश। रचना को पढ़कर वीरता आजादी का जुनून जाग्रित हुआ है। राजस्थान के इतिहास की वीरता साहस रजपूती आन बान की सत्यता का प्रतीक है
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    Maaya "Maaya"
    03 जुलाई 2020
    ऐसा लगता है कि ये कविता लिखते वक्त स्वयं मां सरस्वती कन्हैया लाल जी कलम पर विराजमान हुईं थीं।
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    Girdharilal Seervi
    09 जनवरी 2021
    बहुत ही अच्छी कविता है।