pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

पेंच

610
4.1

आज उड़ा रहा हूँ पतंग मैं ऊँची, बहुत ऊँची लड़ा रहा हूँ पेंच तारों से देखो वहाँ दूर कट-कट के गिर रहे हैं ग्रह-नक्षत्र जो लिख रहे थे भाग्य मेरा-तुम्हारा कुछ देर पहले तक वो देखो राहू-केतू आ गए हैं नीचे ...