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पीठ में खंजर

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बर्दाश्त की इंतहा   हुई, शीश कब तक झुका रहे साथ में खड़े रहो सब पहरेदार   सा डंटा  रहे शीतल मेघ मान हम ने झुका लिए थे सिर कभी आग जो गिरने लगे अब हो गयी  इन्तहां   अभी उनके नैन में शील नहीं खंजर ...

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लेखक के बारे में

प्रतीक प्रभाकर ने साहित्य के क्षेत्र में अपना पदार्पण बालकवि के रूप में किया था। हृदय से साहित्यानुरागीऔर कर्म से एम. बी.बी.एस डॉक्टर नित नई रचनायें लिख रहे हैं। अब तक इनकी सौ से अधिक रचनाओं का प्रकाशन विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और साझा संकलन के अलावा यूट्यूब चैनल्स में हो चुका है। ये कई साहित्यिक एप्स और समूहों में सक्रिय हैं। भविष्य में भी इनकी रचनाओं का स्वागत है।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Rajeshwari Devi
    07 নভেম্বর 2020
    बहुत अच्छा लिखा कम शब्दों में ही बहुत कुछ कह दिया बहुत खूबसूरत लिखा है
  • author
    Vimal sid
    07 মে 2019
    बात बहुत सही कहा आपने जो काबिले तारीफ़ है
  • author
    08 মে 2019
    बहुत बढ़िया...👌👌👌
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    Rajeshwari Devi
    07 নভেম্বর 2020
    बहुत अच्छा लिखा कम शब्दों में ही बहुत कुछ कह दिया बहुत खूबसूरत लिखा है
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    Vimal sid
    07 মে 2019
    बात बहुत सही कहा आपने जो काबिले तारीफ़ है
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    08 মে 2019
    बहुत बढ़िया...👌👌👌