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* पीछे मुड़कर कभी न देखो *

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पीछे मुड़ कर कभी न देखो (यह कविता मेरे काव्य-संकलन *मिटने वाली रात नहीं* से ली गई है।) पीछे मुड़ कर कभी न देखो पीछे मुड़ कर कभी न देखो, आगे ही तुम बढ़ते जाना, उज्वल ‘कल’ है तुम्हें बनाना, वर्तमान ना ...

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लेखक के बारे में

आनन्द विश्वास (Anand Vishvas) जन्म तारीखः-- 01- 07-1949 जन्म एवं शिक्षा- शिकोहाबाद (उत्तर प्रदेश) अध्यापन- अहमदाबाद (गुजरात) और अब- स्वतंत्र लेखन (नई दिल्ली) प्रकाशित कृतियाँ- 1. “देवम” (बाल-उपन्यास) (वर्ष-2012) डायमंड बुक्स दिल्ली। 2. “मिटने वाली रात नहीं” (कविता संकलन) (वर्ष-2012) डायमंड बुक्स दिल्ली। 3. “पर-कटी पाखी” (बाल-उपन्यास) (वर्ष-2014) डायमंड बुक्स दिल्ली। 4. “बहादुर बेटी” (बाल-उपन्यास) (वर्ष-2015) उत्कर्ष प्रकाशन, मेरठ और pratilipi.com पर सम्पूर्ण बाल-उपन्यास पठनीय। 5. “मेरे पापा सबसे अच्छे” (बाल-कविताएँ) (वर्ष-2016) उत्कर्ष प्रकाशन, मेरठ और pratilipi.com पर सम्पूर्ण बाल-कविताएँ पठनीय। प्रबंधन- फेसबुक पर बाल साहित्य के बृहत् समूह “बाल-जगत” एवं “बाल-साहित्य” समूह का सफल संचालन। ब्लागस्- 1. anandvishvas.blogspot.com 2. anandvishwas.blogspot.com “समाज की बौनी मान्यताओं, जहरीले अंधविश्वास और आज के वेदना एवं मुश्किलों के बोझ से पिघलते जीवन के प्रति विद्रोही स्वर।” सम्पर्क का पता:- आनन्द विश्वास सी/85 ईस्ट एण्ड एपार्टमेन्ट्स, न्यू अशोक नगर मेट्रो स्टेशन के पास, मयूर विहार फेज़-1 नई दिल्ली-110096 मो.न.- 7042859040, 9898529244. ई-मेलः [email protected] ***

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    19 सितम्बर 2015
    कैसे ये होते हैं अपने, जो सपनों को तोडा करते हैं.  मुश्किल में हों आप अगर तो, झटपट मुंह मोड़ा करते हैं.  आनंद जी बहुत अच्छी पक्तियां हैं. इसमें अगर "जो" को हटा दिया जाय तो लय और प्रवाह में सही  गति आ सकती है. बाकी बहुत ही सुन्दर कविता.. साधुवाद..!!!
  • author
    विपिन भट्ट
    24 अगस्त 2018
    अन्धकारमय जीवन में दीप किरन दिखलाई है। सुप्त हिय उत्साह भरे जो यह कविता कृति तुम्हारी है।।
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    07 सितम्बर 2022
    अत्यन्त ही प्रेरणादायी रचना । हार्दिक साधुवाद
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    19 सितम्बर 2015
    कैसे ये होते हैं अपने, जो सपनों को तोडा करते हैं.  मुश्किल में हों आप अगर तो, झटपट मुंह मोड़ा करते हैं.  आनंद जी बहुत अच्छी पक्तियां हैं. इसमें अगर "जो" को हटा दिया जाय तो लय और प्रवाह में सही  गति आ सकती है. बाकी बहुत ही सुन्दर कविता.. साधुवाद..!!!
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    विपिन भट्ट
    24 अगस्त 2018
    अन्धकारमय जीवन में दीप किरन दिखलाई है। सुप्त हिय उत्साह भरे जो यह कविता कृति तुम्हारी है।।
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    अरविन्द सिन्हा
    07 सितम्बर 2022
    अत्यन्त ही प्रेरणादायी रचना । हार्दिक साधुवाद