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कुछ लफ्जों के मोती

4.9
451
कवितासमीक्षा

हम ना बात बात पर बहुत दुखी होते है। "और तब ज्यादा होते हैं जिसे हम या जो हमारे बहुत करीब होता है और वही हमारी ना सुने " या other than कि हमारे पास ये नही है, वो नही है, हम ना हर समय रोते रहते है ...

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लेखक के बारे में
author
Saurabh Thakur

I'm a portrait artist, writer and laborious type reader Instagram: roxrite_____ooo https://instagram.com/roxrite_____ooo?igshid=16bkj54gyg76z

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Poonam Kaparwan pikku
    10 सितम्बर 2019
    बहुत सही कहा आपने आप और भी  अच्छा लिखेंगे मेरी शुभकामनाएं सदा आपके साथ है ।
  • author
    ✨ आँचल सोनी हिया
    10 सितम्बर 2019
    वाकई लाजवाब ! मुझे आपकी ये आर्टिकल बेहद अनहद पसंद आई। सबसे अच्छी बात मुझे यह लगी कि, इसमें कोई भी लिखा हुआ शब्द बनावटी या घुमावदार तरीके से नहीं है। पारदर्शी हैं। आपने ट्रांसपेरेंट वर्ड का यूज कर इस आर्टिकल को लिखा है। और बेहद जायज़ और सही भी लिखा है। मुझे जहां तक आशा है... आपने अपने उजनी अनुभव को संजोया है। जिसे अब आप फॉलो करने लगे हैं। आपको ढेर सारी बधाई बहुत खूब। 👌👌🌸🌸🌸💐💐🙏🏻🙏🏻
  • author
    Ashish Jain
    10 सितम्बर 2019
    बड़ा अच्छा लिखते हो, पर बीच बीच में जो शायरी उपयोग करते हो, उसके अंत में शायर का नाम भी दो..! कितना अच्छा शेर था बशीर बद्र साहब का "परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता.." उन्ही का इसी ग़ज़ल का एक शेर और है कि " हजारों शेर मेरे सो गये कागज की कब्रों में अजब मां हूं कोई बच्चा मेरा ज़िन्दा नहीं रहता.."
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    Poonam Kaparwan pikku
    10 सितम्बर 2019
    बहुत सही कहा आपने आप और भी  अच्छा लिखेंगे मेरी शुभकामनाएं सदा आपके साथ है ।
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    ✨ आँचल सोनी हिया
    10 सितम्बर 2019
    वाकई लाजवाब ! मुझे आपकी ये आर्टिकल बेहद अनहद पसंद आई। सबसे अच्छी बात मुझे यह लगी कि, इसमें कोई भी लिखा हुआ शब्द बनावटी या घुमावदार तरीके से नहीं है। पारदर्शी हैं। आपने ट्रांसपेरेंट वर्ड का यूज कर इस आर्टिकल को लिखा है। और बेहद जायज़ और सही भी लिखा है। मुझे जहां तक आशा है... आपने अपने उजनी अनुभव को संजोया है। जिसे अब आप फॉलो करने लगे हैं। आपको ढेर सारी बधाई बहुत खूब। 👌👌🌸🌸🌸💐💐🙏🏻🙏🏻
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    Ashish Jain
    10 सितम्बर 2019
    बड़ा अच्छा लिखते हो, पर बीच बीच में जो शायरी उपयोग करते हो, उसके अंत में शायर का नाम भी दो..! कितना अच्छा शेर था बशीर बद्र साहब का "परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता.." उन्ही का इसी ग़ज़ल का एक शेर और है कि " हजारों शेर मेरे सो गये कागज की कब्रों में अजब मां हूं कोई बच्चा मेरा ज़िन्दा नहीं रहता.."