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पावस की निशा

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पावस की निशा -::- मेघ दूत बनकर आए अवनी को हर्षाने। निसर्ग की छटा अति पावन दृश्य मनोरम दर्षाने। वृष्टि ऋतु में सृष्टि की सारंगी बाजे। समीर के कोमल राग संग मेघ मृदंग गाजे। यामा यादृश-तादृश बिन मयंक-खग ...

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लेखक के बारे में

भाव और भाषा जीवन के विस्तार हैं, कदम कदम पर जीवन के श्र्ंगार हैं।

समीक्षा
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  • author
    Sandip Sharmaz . Sharmaz "Lucky"
    28 जुलाई 2022
    हिन्दी को जीवंत रखती आपकी यह भी कृति अद्भुत रचना।जयश्रीकृष्ण जयश्रीकृष्ण जयश्रीकृष्ण।
  • author
    28 जुलाई 2022
    बेहतरीन रचना
  • author
    UMA SHARMA "अर्तिका"
    28 जुलाई 2022
    आपका लेखन सदैव काव्य सौंदर्य,,, सुंदर शब्दों से अलंकृत होता है आपकी हर रचना से नए शब्दों को सीखने की प्रेरणा मिलती है आपका लेखन बहुत ही उम्दा है,, अद्वैत,,,, अनुपम अलौकिक और काव्यात्मक शैली में मनोभावों को अभिव्यक्ति किया है सुन्दर प्रस्तुति 👌👌👌👌 भाई जी आपको सादर नमन 🌺🙏
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    Sandip Sharmaz . Sharmaz "Lucky"
    28 जुलाई 2022
    हिन्दी को जीवंत रखती आपकी यह भी कृति अद्भुत रचना।जयश्रीकृष्ण जयश्रीकृष्ण जयश्रीकृष्ण।
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    28 जुलाई 2022
    बेहतरीन रचना
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    UMA SHARMA "अर्तिका"
    28 जुलाई 2022
    आपका लेखन सदैव काव्य सौंदर्य,,, सुंदर शब्दों से अलंकृत होता है आपकी हर रचना से नए शब्दों को सीखने की प्रेरणा मिलती है आपका लेखन बहुत ही उम्दा है,, अद्वैत,,,, अनुपम अलौकिक और काव्यात्मक शैली में मनोभावों को अभिव्यक्ति किया है सुन्दर प्रस्तुति 👌👌👌👌 भाई जी आपको सादर नमन 🌺🙏