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पर्यावरण के दोहे

4.8
1368

छह ऋतु, बारह मास हैं, ग्रीष्म-शरद-बरसात स्वच्छ रहे पर्यावरण, सुबह-शाम, दिन-रात // १ // कूके कोकिल बाग में, नाचे सम्मुख मोर मनोहरी पर्यावरण, आज बना चितचोर // २ // खूब संपदा कुदरती, आँखों से...

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लेखक के बारे में

जन्म: 24 जुलाइ 1971, दिल्लीशिक्षा: दिल्ली विश्विद्यालय से स्नातकभाषा अधिकार: हिन्दी, उर्दू, गढ़वाली बोली उत्तरांचाली साहित्य संस्थान के संस्थापक कथा संसार में उपसंपादक, आर्ट्स कॉलिंग आर्टिस्ट्स ग्रुप में वाइस-प्रेसिडेंट, आम आदमी पार्टी के सक्रिय सदस्य सम्पादिक पुस्तक: आपकी उड़ान- भाग एक, आम आदमी पार्टी के कवियों की पहली पुस्तक(2013) साहित्यिक लेखन एवं रुचियाँ: कहानी, लघुकथा, गीत, गज़ल, जनक छंद, दोहे, हाइकू, मुक्तक, कुंडलियाँ, छप्पय आदि प्रकाशित कृतियाँ: तीन पीढ़ियाँ: तीन कथाकार(कहानी संग्रह) प्रेमचंद, मोहन राकेश एवं महावीर उत्तरांचाली की 4-4 प्रतिनिधि कहानियाँ, 2007आग का दरिया(ग़ज़ल संग्रह), 2009आग यह बदलाव की(ग़ज़ल संग्रह), 2013मन में नाचे मोर है(जनक छंद संग्रह), 2009, 2014अंतरघट तक प्यास(दोहा संग्रह), 2009बुलंद अशआर(चुनिंदा शेर) 2009 अनेकानेक अन्य सम्पादिक पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    15 अगस्त 2022
    पर्यावरण की महत्ता का सुंदर प्रतिपादन , पर्यावरण ही है सुखमय जीवन का आधार । साधुवाद
  • author
    Abdheshwar Prasad Pateriya
    20 सितम्बर 2023
    प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहन का बेहतर प्रयास
  • author
    Girdharilal Seervi
    21 जनवरी 2021
    अच्छे दोहे
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    अरविन्द सिन्हा
    15 अगस्त 2022
    पर्यावरण की महत्ता का सुंदर प्रतिपादन , पर्यावरण ही है सुखमय जीवन का आधार । साधुवाद
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    Abdheshwar Prasad Pateriya
    20 सितम्बर 2023
    प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहन का बेहतर प्रयास
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    Girdharilal Seervi
    21 जनवरी 2021
    अच्छे दोहे