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पर्वतीय क्षेत्रों से युवा वर्ग का पलायन ,कारण और निदान

4.3
1607

"मेखलाकर पर्वत अपार अपने सहस्‍त्र दृग-सुमन फाड़, अवलोक रहा है बार-बार दर्पण सा फैला है विशाल". महाकवि पन्त ने पर्वत मालाओं की सुन्दरता को लेखनी बद्ध करते समय शायद ही कभी सोचा हो कि इन पर्वत ...

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लेखक के बारे में

नाम -श्रीमती मंजुल भटनागर . अध्यापन क्षेत्र से जुडी रही हूँ। आर्मी परिवार से हूँ ,इसी कारण देश के सभी बड़े छोटे शहर और गाँवों में रहने का मौका मिला। जहां एक ओर पंजाब की उमंग और खेत मन मोहते हैं ,वहीँ सिक्कम की कंचनजंघा से निकलती तीस्ता नदी ,और पहाड़ों की खूबसूरती मन मोह लेती है। एक तरफ कोणार्क टेम्पल और नीला स्वच्छ समुन्द्र और दूसरी ,और माया नगरी का विशाल समुन्द्र। इन सभी अनुभव को बटोर कर जो व्यक्तित्व बना उसमे पूरा हिन्दुस्तान समाया हुआ है. १. मेरी रचनाएँ लेख ,कहानी ,कवितायेँ इन पत्रिकाओं में शामिल हुए - सारथ , अभिव्यक्ति , अनुभूति , नव्या, प्रवक्ता ,उदन्ती, हाइकू कोष ,हिन्दी-पुष्प ,प्रयास आगमन ,सृजन ,कविमन,सहज साहित्य ,वृत्त मित्र, लेखनियाँ, परिकल्पना ,साहित्य रागिनी शब्द व्यंजना.अपनी रचनाओं के लिए कुछ सम्मान पत्र भी हासिल किये हैं . २. बच्चों की कहानियां और कविताएँ लिखने में भी रूचि है ,कुछ कवितायेँ बच्चों की पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हुई हैं. ३. मेरी कुछ पुस्तकें जैसे - आधी आबादी का सच ,प्रेमाभिव्यक्ति काव्य संग्रह ,अंजुरी ,अनुगूंज ,हिंदी साहित्य के आईने में स्त्री विमर्श {निबंध संग्रह} सांझा प्रयास में छप चुकी हैं . कुछ पुस्तकें प्रकाशित होने वाली हैं . मेरी प्रिय काव्य की पंक्तियाँ हैं ----- "गहन सघन मनमोहक वन तरु, मुझको आज बुलाते हैं किन्तु किये जो वादे मैंने, याद मुझे वो आते हैं अभी कहाँ आराम मुझे ,यह मूक निमंत्रण छलना है अरे ,अभी तो मीलों मुझको , मीलों मुझको चलना"। Robert Frost translated by Harivansh Rai Bachchan. मंजुल भटनागर मुंबई दिनांक २८ अक्टूबर ०९८९२६०११०५ [email protected]

समीक्षा
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  • author
    Manish Mishra
    14 सितम्बर 2020
    आपने बहुत ही सुंदर तरीके से पहाड़ी लोगो की यथास्थिति का वर्णन किया लेकिन मेरा ये कहानी पढ़ने का उद्देश्य यात्रावृत्तांत था जो कि मुझे नही मिला ।
  • author
    Atmaram Meghwanshi "राजू"
    01 मार्च 2022
    निश्चय ही आपने जो लिखा है सत्य और आज के हालात है । पहाड़ों पर तो ये समस्यें आज की नही सदियों पुरानी है , हां पहले साधन और मशीनें कम थी । अब इंसान की बनाई मशीनें ही उसकी दुश्मन हो गई। इसीलिए तो ये कहावते बनी हैं । 1 दूर से डूंगर सुहाने लगते हैं। 2 पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी उसके काम नहीं आती हैं। यहां जवानी वहां के लोगों की है , जो जवानी में मैदानी इलाकों में मजदूरी , नौकरी करने चले जाते हैं और वहां पर बरसा पानी भी बह कर नीचे मैदानी इलाकों में चला जाता हैं। हम जिस तरह से अपने लालच में वहां के पेड़ , पशु पक्षी , कीट पतंग नष्ट कर रहें , जिससे पर्यावरण बहुत तेजी से बदल रहा है । जिससे हम सबके जीवन पर खतरा बढ़ गया है। फिर भी लोग समाज नहीं रहें हैं। आपको ज्ञात होगा की चाइना ने विश्व का सबसे बड़ा डेम याने बांध बनाया है उसमें एकत्र पानी से पृथ्वी का संतुलन बिगड़ रहा है , वैज्ञानिक कहते ही उसकी गति कम हो गई है । इससे जो दुश परिमाण आयेगे वो तो आएगा ही लेकिन अगर वो टूट गया तो भारत के कई राज्य में तबाही आ जायेगी । ईश्वर ही सबको सद्बुद्धि दे।
  • author
    Pawan Chowdhary
    26 अप्रैल 2022
    लेखक का जमीनी हकीकत से कोई संबंध नहीं है। मुख्य कारण यह है कि आज के युवा खेती या संबंधित व्यवसाय से अल्प आय नहीं चाहते हैं वे भी आज के युवाओं की तरह अधिक कमाना चाहते हैं
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    Manish Mishra
    14 सितम्बर 2020
    आपने बहुत ही सुंदर तरीके से पहाड़ी लोगो की यथास्थिति का वर्णन किया लेकिन मेरा ये कहानी पढ़ने का उद्देश्य यात्रावृत्तांत था जो कि मुझे नही मिला ।
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    Atmaram Meghwanshi "राजू"
    01 मार्च 2022
    निश्चय ही आपने जो लिखा है सत्य और आज के हालात है । पहाड़ों पर तो ये समस्यें आज की नही सदियों पुरानी है , हां पहले साधन और मशीनें कम थी । अब इंसान की बनाई मशीनें ही उसकी दुश्मन हो गई। इसीलिए तो ये कहावते बनी हैं । 1 दूर से डूंगर सुहाने लगते हैं। 2 पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी उसके काम नहीं आती हैं। यहां जवानी वहां के लोगों की है , जो जवानी में मैदानी इलाकों में मजदूरी , नौकरी करने चले जाते हैं और वहां पर बरसा पानी भी बह कर नीचे मैदानी इलाकों में चला जाता हैं। हम जिस तरह से अपने लालच में वहां के पेड़ , पशु पक्षी , कीट पतंग नष्ट कर रहें , जिससे पर्यावरण बहुत तेजी से बदल रहा है । जिससे हम सबके जीवन पर खतरा बढ़ गया है। फिर भी लोग समाज नहीं रहें हैं। आपको ज्ञात होगा की चाइना ने विश्व का सबसे बड़ा डेम याने बांध बनाया है उसमें एकत्र पानी से पृथ्वी का संतुलन बिगड़ रहा है , वैज्ञानिक कहते ही उसकी गति कम हो गई है । इससे जो दुश परिमाण आयेगे वो तो आएगा ही लेकिन अगर वो टूट गया तो भारत के कई राज्य में तबाही आ जायेगी । ईश्वर ही सबको सद्बुद्धि दे।
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    Pawan Chowdhary
    26 अप्रैल 2022
    लेखक का जमीनी हकीकत से कोई संबंध नहीं है। मुख्य कारण यह है कि आज के युवा खेती या संबंधित व्यवसाय से अल्प आय नहीं चाहते हैं वे भी आज के युवाओं की तरह अधिक कमाना चाहते हैं