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पर्दे में रहने दो

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राज शब्द से हमेशा किसी न किसी षड्यंत्र का या गड़बड़ी का अंदेशा होता है।राज छुपाए जाए हैं और उनकी खूबसूरती उनकी छुपे होने में ही छिपी होती है।आखिर " पर्दा जो उठ जाएगा भेद खुल जाएगा" और भेद खुल ...

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लेखक के बारे में
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asha singh
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Raj Kamra
    10 अक्टूबर 2022
    वाह वाह... आशा जी... आपकी कल्पनाओं की उड़ान.. हमेशा सुंदर वन में होती है... जहाँ से आप अपने नाम अनुरूप आशा.. उठा कर उसे कल्पना के साथ मिश्रण बना कर... एक सुंदर सा वाकया बना देती है... बहुत खूब... हम आपका ये खुला राज़ किसी को नहीं बताएगें.... पक्के से... 😊🙏🏼🕉👍
  • author
    Suresh Deshmukh
    09 अक्टूबर 2022
    गंभीर राज... भविष्य के पन्नों पर भूतकाल का है राज... सुंदर प्रस्तुति 👍👌🙏
  • author
    दत्ता सावंत
    10 अक्टूबर 2022
    बेहतरीन प्रस्तूती👌👌👌👌बहुत सार्थक और शानदार सृजन 👌👌👌👌
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Raj Kamra
    10 अक्टूबर 2022
    वाह वाह... आशा जी... आपकी कल्पनाओं की उड़ान.. हमेशा सुंदर वन में होती है... जहाँ से आप अपने नाम अनुरूप आशा.. उठा कर उसे कल्पना के साथ मिश्रण बना कर... एक सुंदर सा वाकया बना देती है... बहुत खूब... हम आपका ये खुला राज़ किसी को नहीं बताएगें.... पक्के से... 😊🙏🏼🕉👍
  • author
    Suresh Deshmukh
    09 अक्टूबर 2022
    गंभीर राज... भविष्य के पन्नों पर भूतकाल का है राज... सुंदर प्रस्तुति 👍👌🙏
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    दत्ता सावंत
    10 अक्टूबर 2022
    बेहतरीन प्रस्तूती👌👌👌👌बहुत सार्थक और शानदार सृजन 👌👌👌👌