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पराई बेटी...

4.8
1209

मेरी शादी के बाद पग फेरो  के लिये  भैया मुझे  लेने आये  ...मै बहुत खुशी खुशी सब तैयारी कर रही थी ...क्योंकि मेरा ससुराल दूसरे शहर था तो पग फेरो के लिये जाने पर एक सप्ताह बाद ही ससुराल वापस आना था ...

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लेखक के बारे में
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Nita Shukla Dubey

मन की बाते व्यक्त करती हूँ ।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    संध्या बक्शी
    04 अक्टूबर 2019
    आपकी कलम ने हर बेटी की दास्तां बयां करी । बहुत दुख होता है जब उसे ,ये एहसास होता है ,कि वो अब न यहां की रही न वहाँ की । शब्दशैली बेहद प्रभावित करने वाली । 🙏🌸🌸
  • author
    Sushma Sharma
    03 अक्टूबर 2019
    सारा दर्द ओह से बाहर आ गया, बहुत सारे सवाल जवाब दे गई आपकी कहानी, कितना कड़वा सच है ये, पर ऐसा क्यों?????? शरीर से आत्मा कैसे अलग हो सकती है, कैसे पराई हो सकती है???? कभी नहीं गलत प्रथाओं का विरोध करना चाहिए, लीक से हटकर चले अपने से बड़े भी। सब कुछ समाया हुआ है आपकी लघु कथा में नीता शुभकामाएं 🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏
  • author
    03 अक्टूबर 2019
    कितना कुछ कह गयी आपकी ये रचना चंद लफ़्ज़ों में नीतू!वही बेटी जिसे पल में समाज पराया कर देता है वही कभी-कभी बेटों के मुंह मोड़ लेने पर सहारा बनती है वृद्ध माता-पिता का.......सहसा ही आँखें नम हो गईं आज आपकी रचना पढ़कर👏👏👏👏👏👏👌👌👌👌👌👌👌👌💐💐💐💐💐💐💐
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    संध्या बक्शी
    04 अक्टूबर 2019
    आपकी कलम ने हर बेटी की दास्तां बयां करी । बहुत दुख होता है जब उसे ,ये एहसास होता है ,कि वो अब न यहां की रही न वहाँ की । शब्दशैली बेहद प्रभावित करने वाली । 🙏🌸🌸
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    Sushma Sharma
    03 अक्टूबर 2019
    सारा दर्द ओह से बाहर आ गया, बहुत सारे सवाल जवाब दे गई आपकी कहानी, कितना कड़वा सच है ये, पर ऐसा क्यों?????? शरीर से आत्मा कैसे अलग हो सकती है, कैसे पराई हो सकती है???? कभी नहीं गलत प्रथाओं का विरोध करना चाहिए, लीक से हटकर चले अपने से बड़े भी। सब कुछ समाया हुआ है आपकी लघु कथा में नीता शुभकामाएं 🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏
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    03 अक्टूबर 2019
    कितना कुछ कह गयी आपकी ये रचना चंद लफ़्ज़ों में नीतू!वही बेटी जिसे पल में समाज पराया कर देता है वही कभी-कभी बेटों के मुंह मोड़ लेने पर सहारा बनती है वृद्ध माता-पिता का.......सहसा ही आँखें नम हो गईं आज आपकी रचना पढ़कर👏👏👏👏👏👏👌👌👌👌👌👌👌👌💐💐💐💐💐💐💐