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पराई बेटी

4.7
33843

ये कहानी है सुनीता जी और उनकी बेटी अंजू की जो अपनी माँ को एक खत के जरिये अपनी बहू स अच्छे व्यवहार की गरजारिष करती है

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लेखक के बारे में

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से एम कॉम करने के बाद , पिछले कुछ समय से लिखना शुरू किया , अपनी लेखनी के माध्यम से कुछ अधूरे किस्से पूरे करती हूं , कुछ सामाजिक बुराईयों का हल ढूंढने की कोशिश भी करती हूं , जिसके माध्यम से समाज को अच्छा सन्देश दे सकूँ , हाल ही में शिकायत प्रतियोगिता में सांत्वना पुरस्कार मिलने से सकारात्मक भाव आया है , समाचार पत्रों में समय समय पर लेख , कवितायें प्रकाशित होती है , आज लेखनी में जो भी पहचान बना पाई हूँ , उसका पूरा श्रेय मेरी मां को जाता है जो अब हमारे बीच नही है अगर अच्छी लेखक बन पाऊं तो उन्हें ये मेरी सच्ची श्रद्धाजंलि होगी ।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    शिल्पी रस्तोगी
    01 नवम्बर 2018
    😢 हर लड़की अगर ऐसी सोच रखें तो रिश्तें वास्तव में ना केवल सहज बनेंगे बल्कि उनमें भावात्मक रूप से भी मजबूती होगी, वक्त पर ऐसे रिश्तें ही संबल और साहस देने में अहम भूमिका निभाते हैं ....
  • author
    Aadi Pathak
    09 जून 2021
    बहुत ही शानदार रचना,ऐसा लगा जैसे अंजू के रूप में खुद की ही कहानी पढ़ रही हूं,लगभग हर समझदार लड़की जो अपने मायके और ससुराल दोनों जगहों पर सब कुछ अच्छा देखना सबको खुश रखना चाहती है,वह शायद अंजू की तरह ही होती है।
  • author
    Backstreet stars
    27 मार्च 2021
    ऐसा ही होता हैं जैसे अंजू के साथ हुआ मैंने अपने जीवन देखा हैं । अपनी बेटी की गलत बात मे भी अच्छाई दिखती हैं और बहु की सही बात मे भी बुराई ढूंढ लेती हैं ये गलत बात हैं
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    शिल्पी रस्तोगी
    01 नवम्बर 2018
    😢 हर लड़की अगर ऐसी सोच रखें तो रिश्तें वास्तव में ना केवल सहज बनेंगे बल्कि उनमें भावात्मक रूप से भी मजबूती होगी, वक्त पर ऐसे रिश्तें ही संबल और साहस देने में अहम भूमिका निभाते हैं ....
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    Aadi Pathak
    09 जून 2021
    बहुत ही शानदार रचना,ऐसा लगा जैसे अंजू के रूप में खुद की ही कहानी पढ़ रही हूं,लगभग हर समझदार लड़की जो अपने मायके और ससुराल दोनों जगहों पर सब कुछ अच्छा देखना सबको खुश रखना चाहती है,वह शायद अंजू की तरह ही होती है।
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    Backstreet stars
    27 मार्च 2021
    ऐसा ही होता हैं जैसे अंजू के साथ हुआ मैंने अपने जीवन देखा हैं । अपनी बेटी की गलत बात मे भी अच्छाई दिखती हैं और बहु की सही बात मे भी बुराई ढूंढ लेती हैं ये गलत बात हैं