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पंडुक

4.7
6272

अलार्म की आवाज सुनते ही हड़बड़ा के उठ बैठी,लेकिन तन अभी अलसाया ही था।मोबाइल देखा तो छह बज गए थे।इतने में पंडुक की आवाज ने पंखुरी की शरीर में स्फूर्ति भर दी झट से दौड़कर बालकनी में पहुंच गयी। एकदम ही ...

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लेखक के बारे में

*मेरी रचनाएं स्वरचित ✍️ हैं। कृपया मेरी रचनाओ को पढ़कर अपनी अनमोल प्रतिक्रिया अवश्य दें,जो हमारी लेखनी को परिष्कृत करने में फलीभूत होगी!

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Madhukar Mohan
    19 दिसम्बर 2019
    आधुनिकता और पर्यावरण के बीच तालमेल बैठाये बगैर हम सही मायने में विकास नहीं कर सकते। बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति।
  • author
    Shilpi mishra
    21 दिसम्बर 2019
    Beautiful narration. A must read to be recommended to everyone!
  • author
    amrita pandey
    19 दिसम्बर 2019
    Infallible writing...you feel you are with the characters
  • author
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  • author
    Madhukar Mohan
    19 दिसम्बर 2019
    आधुनिकता और पर्यावरण के बीच तालमेल बैठाये बगैर हम सही मायने में विकास नहीं कर सकते। बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति।
  • author
    Shilpi mishra
    21 दिसम्बर 2019
    Beautiful narration. A must read to be recommended to everyone!
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    amrita pandey
    19 दिसम्बर 2019
    Infallible writing...you feel you are with the characters