
प्रतिलिपिचुनांचे आए दिन पांडेय जी के जीवन में कुछ न कुछ घटता रहता हैं।कभी कुछ खट्टा तो कभी कुछ मीठा। पांडेय जी अपने इलाके के बड़े जाने-माने लेखक थे।खूब पैरोडी करते।लोग वाह-वाह भी करते।अपने हुनर का लोहा मनवाने में वे बड़े पक्के थे। पूजा पाठ भी करते।तुलसी के पौधे में जल अभिषेक करते।माथे पर चन्दन का टीका लगाते।मंदिर भी तभी जाते जब उनके ऊपर कोई संकट मंडरा रहा होता। वैसे शादी -शुदा थे,पर आम आदमी की तरह थोड़े दिल फैंक भी थे।अब दिल है तो जाहिर है किसी पर भी आ सकता है।आखिर जोर थोड़े ही हैं,क़ि रोक के रखे। पांडेय जी ...
रिपोर्ट की समस्या
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