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पाल रहे नागराज

3.9
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हम असफ़ल प्रयत्न करने के- आदी हो गये हैं अच्छी से अच्छी लच्छेदार बातें करने में- माहिर हो गये हैं कोई हमारी सुने या न सुने हम सुनाने के शौकिन हो गये हैं आसन, आश्वासन, भा‍षण, अनुमोदन अब हमारी परिपाटी...

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लेखक के बारे में
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गोवर्धन यादव
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    alka yadav
    25 ഏപ്രില്‍ 2018
    sir very very nice...
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    24 ഒക്റ്റോബര്‍ 2015
    फुंसकारता जैसे शब्द राष्ट्र भाषा अनुसरण दर्शाते हैं। एक अत्यंत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है ।
  • author
    18 ജനുവരി 2022
    बेहद खूबसूरत रचना है। 🌺🌷🌹🌻🌼❤️❤️❤️❤️🌺🌷🌹🌻🌼
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    alka yadav
    25 ഏപ്രില്‍ 2018
    sir very very nice...
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    Satyendra Kumar Upadhyay
    24 ഒക്റ്റോബര്‍ 2015
    फुंसकारता जैसे शब्द राष्ट्र भाषा अनुसरण दर्शाते हैं। एक अत्यंत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है ।
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    18 ജനുവരി 2022
    बेहद खूबसूरत रचना है। 🌺🌷🌹🌻🌼❤️❤️❤️❤️🌺🌷🌹🌻🌼