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पहले मेरी माँ है!

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आज मेरी माँ ने अंतिम साँस ली, फिर तो सारा घर दौड़ने लगा यह क्या हो गया? वह दादी माँ जिसने हमेशा उसको दुत्कारा था, पास बैठी रोने का नाटक कर रही थी। वह ताई जिसने उसको कभी चैन से रहने नहीं दिया। मेरे सर...

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लेखक के बारे में

रेखा श्रीवास्तव पिता: स्व. श्री छेदालाल श्रीवास्तव माता: स्व. श्रीमती प्रेम कुमारी पति : श्री आदित्य श्रीवास्तव निवास : कानपुर बचपन से ही लिखने का शौक , जो पिता से विरासत में मिला , प्रकाशन भी बाल जगत से आरम्भ मात्र ९ वर्ष की आयु में। सदा भोगा हुआ यथार्थ लेखन का विषय बना। कहानी , लेख , कविता सारी विधाओं में लेखन और स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों की साप्ताहिक पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशन। शिक्षा : एम ए (राजनीती शाश्त्र एवं समाज शास्त्र ) , एम एड , डिप्लोमा इन कंप्यूटर साइंस। २४ साल आई आई टी कानपूर में कंप्यूटर साइंस विभाग में मशीन अनुवाद परियोजना में कार्य। सम्प्रति स्वतन्त्र लेखन एवं काउंसलर का कार्य।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Mahima Shrivastava
    11 ಸೆಪ್ಟೆಂಬರ್ 2018
    अक्सर पति यह समझते हैं कि वे ही अपनी मां के पुत्र हैं और भूल जाते हैं कि उनकी संतान की भी मां है वो महिला जो उनके इशारों पर नाचती रहती है। पिता की तरह बालक भी अपनी मां को बहुत चाहता है। कहानी मार्मिक है और मृत्यु पश्चात मां का पक्ष ले अन्याय का प्रतिकार कर रहे बालक की मनोदशा दर्शाती है।
  • author
    Sabir Shaikh
    28 ಏಪ್ರಿಲ್ 2018
    💓 touching story
  • author
    Mamta Upadhyay
    28 ಫೆಬ್ರವರಿ 2019
    बहुत खूबसूरत स्टोरी
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  • author
    Mahima Shrivastava
    11 ಸೆಪ್ಟೆಂಬರ್ 2018
    अक्सर पति यह समझते हैं कि वे ही अपनी मां के पुत्र हैं और भूल जाते हैं कि उनकी संतान की भी मां है वो महिला जो उनके इशारों पर नाचती रहती है। पिता की तरह बालक भी अपनी मां को बहुत चाहता है। कहानी मार्मिक है और मृत्यु पश्चात मां का पक्ष ले अन्याय का प्रतिकार कर रहे बालक की मनोदशा दर्शाती है।
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    Sabir Shaikh
    28 ಏಪ್ರಿಲ್ 2018
    💓 touching story
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    Mamta Upadhyay
    28 ಫೆಬ್ರವರಿ 2019
    बहुत खूबसूरत स्टोरी