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नुक्कड़ की बुढ़िया

4.7
263

मेरे मुहल्ले की गली के नुक्कड़ पर देखता हूँ मैं उसे कई बार होती रहती है उससे मेरी आँखें भी चार इक पुरानी सी मैली साड़ी और लिये हाथ में एक लाठी जो बस रह गयी है सहारा उसका आँखों चढ़ा वो चश्मा मोटे ...

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लेखक के बारे में
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सौरभ वर्मा

मेरा नाम सौरभ वर्मा है। मेरी आयु 27 वर्ष है। मैं मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से स्नातक कर चुका हूँ।वर्तमान में मैं सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया में सहायक शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत हूँ| लेखन का शौक मुझे बचपन से ही रहा है। मेरे कई लेख,कहानियां तथा कवितायेँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित होते रहे हैं।                                                                             

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Aishwarya Agarwal
    07 ജനുവരി 2016
    शब्दों का अद्भुत प्रयोग।अंत रचना को सम्पूर्ण बना देता है।मानसिकता को काफी हद तक परिलक्षित करती है।भावनात्मक रचना
  • author
    Shree Kriti
    22 ഡിസംബര്‍ 2023
    Nice one👌👌👌👌👌👌👌👌👌
  • author
    विकास कुमार
    28 മെയ്‌ 2018
    वाह अधभुद मार्मिक |
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  • author
    Aishwarya Agarwal
    07 ജനുവരി 2016
    शब्दों का अद्भुत प्रयोग।अंत रचना को सम्पूर्ण बना देता है।मानसिकता को काफी हद तक परिलक्षित करती है।भावनात्मक रचना
  • author
    Shree Kriti
    22 ഡിസംബര്‍ 2023
    Nice one👌👌👌👌👌👌👌👌👌
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    विकास कुमार
    28 മെയ്‌ 2018
    वाह अधभुद मार्मिक |