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“ क्या हुआ दीदी ! बड़ी गुमसुम-सी बैठी हो |” - निधि ने सुधा को अकेले किसी सोच में डूबी देखकर, उसके पास बैठते हुए कहा | “ नहीं, कुछ नहीं, ज़िंदगी बस चलती रहती है हिचकौले खाते हुए |” - सुधा ने तन्द्रा ...