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नियति

4.6
420

नन्हा मुन्हा सा था जब वह ट्रेन चलाना चाहता था थोड़ा सा जो बड़ा हुआ उसे फ़ायर-फ़ाइटिंग का शौक़ चढ़ा सीढ़ी से गिर कर जब इन दिन फूटा सिर मेरा ख़ून बहा डाक्टर ही बनेगा अब तो वह विश्वास से भरकर उसने कहा...

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समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sumedha Prakash
    09 अक्टूबर 2018
    मार्मिक रचना... दुःखद अभिव्यक्ति
  • author
    Uttam Kanwar
    16 जून 2019
    भावविभोर
  • author
    kumar gupta
    02 अक्टूबर 2018
    very sad
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    Sumedha Prakash
    09 अक्टूबर 2018
    मार्मिक रचना... दुःखद अभिव्यक्ति
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    Uttam Kanwar
    16 जून 2019
    भावविभोर
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    kumar gupta
    02 अक्टूबर 2018
    very sad