कौन कहता है जिंदगी में .. .. ..कभी खुशहाली नहीं होती.. मौसम में बहार और फिजाओं में.. ... हरियाली नहीं आती.. जो करते हैं बुजुर्गों की निस्वार्थ सेवा ... ...
वाहजी, वाक़ई, लाज़वाब, बेहतरीन अभिव्यक्ति जी ज़नाब। उम्दा लेखन करते हैं आपजी।
निष्काम निरिच्छित सेवा तो, इक रब्बी वरदान है।
जो होती समर्पणपन से,न आता कभी अभिमान है।
निष्फल हों कर्म यूं 'मोहन',जे रहता रब्बी ध्यान है।
रब में वे इकमिकता पाते, होता सबका कल्यान है।
हमने भी टॉपिक पर रचना लिखी है, कृपया पढ़कर समुचित समीक्षा अवश्य करें।
रिपोर्ट की समस्या
सुपरफैन
अपने प्रिय लेखक को सब्सक्राइब करें और सुपरफैन बनें !
वाहजी, वाक़ई, लाज़वाब, बेहतरीन अभिव्यक्ति जी ज़नाब। उम्दा लेखन करते हैं आपजी।
निष्काम निरिच्छित सेवा तो, इक रब्बी वरदान है।
जो होती समर्पणपन से,न आता कभी अभिमान है।
निष्फल हों कर्म यूं 'मोहन',जे रहता रब्बी ध्यान है।
रब में वे इकमिकता पाते, होता सबका कल्यान है।
हमने भी टॉपिक पर रचना लिखी है, कृपया पढ़कर समुचित समीक्षा अवश्य करें।
रिपोर्ट की समस्या
सुपरफैन
अपने प्रिय लेखक को सब्सक्राइब करें और सुपरफैन बनें !
रिपोर्ट की समस्या
रिपोर्ट की समस्या
रिपोर्ट की समस्या