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निर्णय

4.6
92232

विकास हैदराबाद मे अपने आफिस में काम कर रहा था, फोन की घंटी के बजते ही समझ गया मां का फोन होगा।उसकी मां जानकी बार बार फोन करके उसे दिल्ली आने का कार्यक्रम बनाने की जिद्द कर रही थी। जानकी आजकल बहुत ...

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सीमा जैन

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समीक्षा
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  • author
    Amit Upadhyay
    07 ആഗസ്റ്റ്‌ 2017
    कहानी बहुत ही अच्छी है, एल नई सोच, लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि आपको थोड़ा और लिखना था, विकास को लावण्य से मिलना था और उसकी माँ को उनकी गलती का अहसास कराना चाहिए था।
  • author
    पाण्डेय अनिक
    27 ഏപ്രില്‍ 2018
    चलाकियों के दौर में विद्वता की कद्र नहीं। गरीबी से बड़ा तमाचा कोई और नहीं!!
  • author
    30 മെയ്‌ 2019
    पिता की बात ने विकास की नैया को डुबने से बचा लिया विकास के लिए लावण्य ही अच्छी जीवन साथी साबित होगी जो उसके हर सुख दुख मे कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी ।.....!! लाजवाब !!....
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    Amit Upadhyay
    07 ആഗസ്റ്റ്‌ 2017
    कहानी बहुत ही अच्छी है, एल नई सोच, लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि आपको थोड़ा और लिखना था, विकास को लावण्य से मिलना था और उसकी माँ को उनकी गलती का अहसास कराना चाहिए था।
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    पाण्डेय अनिक
    27 ഏപ്രില്‍ 2018
    चलाकियों के दौर में विद्वता की कद्र नहीं। गरीबी से बड़ा तमाचा कोई और नहीं!!
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    30 മെയ്‌ 2019
    पिता की बात ने विकास की नैया को डुबने से बचा लिया विकास के लिए लावण्य ही अच्छी जीवन साथी साबित होगी जो उसके हर सुख दुख मे कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी ।.....!! लाजवाब !!....