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निर्भया की याद मैं

4.2
743

चिथड़े चिथड़े उडी है अस्मत कतरा कतरा मरी हूँ मैं। दुनिया की नजरें क्या देखे स्वनज़रों में गिरी हूँ मैं।। कुछ माँ ने ऐसे लाल जने मेरे जी का वो काल बने। हवस की खातिर कुछ लोगों ने। लहु से मेरे, हाथ सने ...

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लेखक के बारे में
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सरिता पन्थी
समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Deepak Khatana
    13 अक्टूबर 2015
    बेहद उम्दा रचना और मेरे पास इसकी तारीफ़ में शब्द ही नहीं आपकी रचना एक एहसास देती है की हमें बेटियो को ही नहीं बेटो को भी संस्कार देने की आवश्कता है 
  • author
    Ajay Tiwari
    15 अक्टूबर 2015
    Great poem maam.. And thanks to hindi pratilipi ko,ki ish kavita ko fir se ek baar sb log parh sake.,
  • author
    manoj kumar
    19 अक्टूबर 2015
    sundar rachna ..........
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    Deepak Khatana
    13 अक्टूबर 2015
    बेहद उम्दा रचना और मेरे पास इसकी तारीफ़ में शब्द ही नहीं आपकी रचना एक एहसास देती है की हमें बेटियो को ही नहीं बेटो को भी संस्कार देने की आवश्कता है 
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    Ajay Tiwari
    15 अक्टूबर 2015
    Great poem maam.. And thanks to hindi pratilipi ko,ki ish kavita ko fir se ek baar sb log parh sake.,
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    manoj kumar
    19 अक्टूबर 2015
    sundar rachna ..........