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निकम्मे नाकारा दिल को बदल डालो

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प्रतिलिपि जी  सोते अरमान जगा रही रोज रोज नई नई राह दिखा रहीं एक दरवाजा बंद हुआ क्या हुआ चार दरवाजे खुलने वाले हैं दिल एक बार नाकाम रहा कहीं भूल चूक कर गया हिम्मत ना हारना चुप होकर‌ ना बैठ जाना ...

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लेखक के बारे में
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Ashok Kansal

Nothing to show.Writing is not my profession it has become my hobby & passion .

समीक्षा
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  • author
    mohan lal
    17 अक्टूबर 2024
    🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🙏🙏🙏🌺🌺🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏आपके विचारों को प्रणाम करता हूं आप जो भी रचनाएं करते हैं बहुत ही लाजवाब होती है हर सार्थक प्रयास आप करते हो आपसे शिक्षा लेकर मैं भी रचना की है उसे एक बार जरूर पढ़ कर देखें और अपना आशीर्वाद प्रदान करें बहुत-बहुत धन्यवाद🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌺🌺🌺🌺🙏🙏🙏
  • author
    Rakesh Chaurasia
    16 अक्टूबर 2024
    वाह बिल्कुल सही लिखा है आपने।
  • author
    महारानी
    16 अक्टूबर 2024
    बेहतरीन रचना का सृजन
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    mohan lal
    17 अक्टूबर 2024
    🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🙏🙏🙏🌺🌺🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏आपके विचारों को प्रणाम करता हूं आप जो भी रचनाएं करते हैं बहुत ही लाजवाब होती है हर सार्थक प्रयास आप करते हो आपसे शिक्षा लेकर मैं भी रचना की है उसे एक बार जरूर पढ़ कर देखें और अपना आशीर्वाद प्रदान करें बहुत-बहुत धन्यवाद🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌺🌺🌺🌺🙏🙏🙏
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    Rakesh Chaurasia
    16 अक्टूबर 2024
    वाह बिल्कुल सही लिखा है आपने।
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    महारानी
    16 अक्टूबर 2024
    बेहतरीन रचना का सृजन