प्रतिलिपि जी सोते अरमान जगा रही रोज रोज नई नई राह दिखा रहीं एक दरवाजा बंद हुआ क्या हुआ चार दरवाजे खुलने वाले हैं दिल एक बार नाकाम रहा कहीं भूल चूक कर गया हिम्मत ना हारना चुप होकर ना बैठ जाना ...
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