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नया युग

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-: नया युग:- दफ्तर चाहिए साफ- सुथरा, मगर मुंह में रखता पान है। भाषण दिया कल, ईमानदारी का उसके भीतर भी एक बईमान है। कमाई चाहिए एक्स्ट्रा अब खुद में ईमान कौन रखता है? अब तो प्रदर्शन का है जमाना, ...

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लेखक के बारे में
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राघव राणा
समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    सौरदीप अधिकारी
    14 अप्रैल 2025
    नमस्कार। आपकी रचना पढ़के बहुत अच्छा लगा। ये सत्य मे एक बहुत अच्छा लेखन है। ओर लिखते रहिए। मै भी प्रतिलिपि हिंदी में लिखता हूं। मुझे प्रतिलिपि में अनुसरण करते हुए साथ जुड़े रहने का आपसे आन्तरिक अनुरोध रहा। धन्यवाद सहित शुभकामनाएं।
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    सौरदीप अधिकारी
    14 अप्रैल 2025
    नमस्कार। आपकी रचना पढ़के बहुत अच्छा लगा। ये सत्य मे एक बहुत अच्छा लेखन है। ओर लिखते रहिए। मै भी प्रतिलिपि हिंदी में लिखता हूं। मुझे प्रतिलिपि में अनुसरण करते हुए साथ जुड़े रहने का आपसे आन्तरिक अनुरोध रहा। धन्यवाद सहित शुभकामनाएं।