
प्रतिलिपिएक नन्हीं परी थी। बहुत ही सुन्दर। उसका सारा शरीर सोने की तरह दमकता था। उसकी आँखें नीली थीं। जैसे नीलम के दो टुकडे जड़े हों। और कंधे पर चाँदी की सफद दो पंख लगे हुए थे। वह चुलबुली बहुत थी। हर समय उसका मन शैतानी करने के लिए मचलता रहता। इसलिए दूसरी परियाँ उसे नटखट परी कहती थीं। उसकी माँ उसे डाँटती थी कि वह शैतानी न किया करें। पर वह मानती ही नहीं थी। एक दिन की बात है। नटखट परी की माँ बैठी हुई थी। अचानक नटखट परी उड़ती हुई आई और माँ से बोली, ‘‘माँ, माँ! मेरी सहेलियाँ कहती हैं कि यहाँ से दूर, बहुत...
रिपोर्ट की समस्या
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