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नटखट परी

4.3
7379

एक नन्हीं परी थी। बहुत ही सुन्दर। उसका सारा शरीर सोने की तरह दमकता था। उसकी आँखें नीली थीं। जैसे नीलम के दो टुकडे जड़े हों। और कंधे पर चाँदी की सफद दो पंख लगे हुए थे। वह चुलबुली बहुत थी। हर समय उसका मन शैतानी करने के लिए मचलता रहता। इसलिए दूसरी परियाँ उसे नटखट परी कहती थीं। उसकी माँ उसे डाँटती थी कि वह शैतानी न किया करें। पर वह मानती ही नहीं थी। एक दिन की बात है। नटखट परी की माँ बैठी हुई थी। अचानक नटखट परी उड़ती हुई आई और माँ से बोली, ‘‘माँ, माँ! मेरी सहेलियाँ कहती हैं कि यहाँ से दूर, बहुत...

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लेखक के बारे में
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उद्भ्रांत
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    mohini
    02 जुलाई 2017
    5
  • author
    Alok Kumar
    21 दिसम्बर 2024
    Uske baad Bacchon ka kya hoga? Kya Rakshas unhe baad mein maar dega? kyuki bachhe ne uske aankhe par pathar se maara tha.
  • author
    priya
    08 अगस्त 2019
    lovely ise padkar apna bchpan Yaad aagya
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  • author
    mohini
    02 जुलाई 2017
    5
  • author
    Alok Kumar
    21 दिसम्बर 2024
    Uske baad Bacchon ka kya hoga? Kya Rakshas unhe baad mein maar dega? kyuki bachhe ne uske aankhe par pathar se maara tha.
  • author
    priya
    08 अगस्त 2019
    lovely ise padkar apna bchpan Yaad aagya