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नाजायज सम्बन्ध

4.4
252607

समाज ने दो प्यार करने वालों के लिए एक रिश्ता बना दिया है, पति-पत्नी का रिश्ता। इस रिश्ते पर जायज़ रिश्ते का ठप्पा लगाकर इनके दायरे भी समाज ने ही तय करे हैं। क्या हो जब इस जायज़ रिश्ते को भी नाजायज़ ...

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लेखक के बारे में
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वर्षा पंवार

वर्षा पंवार

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    29 मार्च 2019
    ईईईई तो पलट के थप्पड ही पड गया अमूआ के गलुवा पे
  • author
    Meenakshi Dubey "वत्सला"
    25 मार्च 2019
    आज की नारी का बेहतरीन चित्रण। न स्वयं दरकती है ना ही परिवार को दरकने देती है। 👏 👏 👏 👏
  • author
    Rachna Kandwal
    17 सितम्बर 2019
    बेहद सशक्त लेखन और अच्छा चरित्र बनाया आपने। नायिका को थोड़ा और मजबूत दिखाया जा सकता था। वास्तव में नायिका को पलट कर नायक के गाल पर एक थप्पड़ रसीद करना चाहिए था क्योंकि उसे तो पता था कि वो किस से बात कर रही थी।पर क्या उसके पति परमेश्वर को पता था???? एक पुरुष चाहे खुद कितने गर्त में गिर जाए पर उसकी प्राथमिकता हमेशा स्त्री की पवित्रता होती है।
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    29 मार्च 2019
    ईईईई तो पलट के थप्पड ही पड गया अमूआ के गलुवा पे
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    Meenakshi Dubey "वत्सला"
    25 मार्च 2019
    आज की नारी का बेहतरीन चित्रण। न स्वयं दरकती है ना ही परिवार को दरकने देती है। 👏 👏 👏 👏
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    Rachna Kandwal
    17 सितम्बर 2019
    बेहद सशक्त लेखन और अच्छा चरित्र बनाया आपने। नायिका को थोड़ा और मजबूत दिखाया जा सकता था। वास्तव में नायिका को पलट कर नायक के गाल पर एक थप्पड़ रसीद करना चाहिए था क्योंकि उसे तो पता था कि वो किस से बात कर रही थी।पर क्या उसके पति परमेश्वर को पता था???? एक पुरुष चाहे खुद कितने गर्त में गिर जाए पर उसकी प्राथमिकता हमेशा स्त्री की पवित्रता होती है।