pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

नजर की छुअन

4.2
479

तेरी नजर की छुअन से मैं मुकम्मल हो गई सिमट तेरी बाहों में खिलता कमल हो गई और जो तेरे होंठों ने बुदबुदाया नाम मेरा -- -- मैं बेनाम सी मोहब्बत की ग़जल हो गई ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में

नामवर से लेकर नए रचनाकारों की रचनाएँ पढ़ने में अभिरुचि है मेरी --- मन के भावों को कभी कभार कागज पर उकेर लिया करता हूँ - कभी कभार भानुमति की भाँती तुकबंदियों का कुनबा भी जोड़ लिया करता हूँ -- सो लिखने में इतना अच्छा भी नहीं हूँ - तो भी मुझे बहुत से अच्छे रचनाकारों के बीच प्रतिलिपि ने जुड़ने का जो सुअवसर प्रदान किया है - मैं प्रतिलिपि का ह्रदय से आभारी हूँ --- सभी माननीय एवम् प्रिय लेखकों से सादर अनुनय है मेरा अपना आशीर्वाद तथा स्नेह मुझ पर कृपया पूर्वक बनाए रखियेगा - ( विशेष रूप से कहना चाहूँगा कि मैं यहाँ पढ़ने की रुचि के कारण जुड़ा हुआ हूँ )

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Vijaya Singh
    29 सितम्बर 2018
    बहुत अच्छा
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    18 अप्रैल 2023
    बहुत ही सुन्दर । हार्दिक साधुवाद
  • author
    Jai Sharma
    19 मार्च 2023
    राधे राधे राजीव जी बहुत बढ़िया जी
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Vijaya Singh
    29 सितम्बर 2018
    बहुत अच्छा
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    18 अप्रैल 2023
    बहुत ही सुन्दर । हार्दिक साधुवाद
  • author
    Jai Sharma
    19 मार्च 2023
    राधे राधे राजीव जी बहुत बढ़िया जी