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नदी और नारी

4.3
526

नदी और नारी दोनो ही एक रूप हैं। दोनों का ही मेरे भीतर- बाहर रहना, दोनों की अब नियति हो गई है दुःख सहना। कहने को दोनों ही देवी के स्वरूप हैं। भौतिकवादी इस युग में दोनों की दुर्गति, कलुषित और प्रदूषित ...

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समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Manjit Singh
    25 जून 2020
    kavita uch shreni ki hai. padhkar man me karuna aayee. Bhagwan sub par kripa kare
  • author
    Satyesh Singh
    11 जुलाई 2021
    nice
  • author
    विकास कुमार
    18 मई 2018
    वाह
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    Manjit Singh
    25 जून 2020
    kavita uch shreni ki hai. padhkar man me karuna aayee. Bhagwan sub par kripa kare
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    Satyesh Singh
    11 जुलाई 2021
    nice
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    विकास कुमार
    18 मई 2018
    वाह