pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

नादान सी वो लड़की

4.3
1145

कब हो गई सयानी नादान सी वो लड़की पत्तो से खेलती थी पेड़ो पे झूलती थी हर रोज थी जो गढ़ती कोई नई सी कहानी कब हो गई सयानी? नादान सी वो लड़की। जुल्फे थी मानो उसकी जैसे कोई घटाये हरपल में संग रहती सभी की ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में

उपनाम -"वेंणी" शिक्षा -b.com (c.a.)  m.a(english) जन्म तिथि-1/2/1993(आयु 22 वर्ष) प्रकाशित रचनाएँ--लघुकथाएँ,कवितायेँ एवं लेख देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओ में प्रकाशित  (रचना प्रकाशित अखबारो के नाम-दैनिक भास्कर सतना प्लस, जनसंदेस ,राजस्थान पत्रिका "सृजन" ,भोपाल लोकजंग ,झाँसी लोकमत एवं महानगर मेल मुम्बई आदि )

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    piya parihar
    12 अक्टूबर 2015
    lines are so beautiful
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    12 अक्टूबर 2015
    राष्ट्र भाषा व मात्रा का अल्प ज्ञान दर्शाती है । नितांत सारहीन  व  अप्रासांगिक ।पेडो, पत्तो, जुल्फे इत्यादि शब्द राष्ट्र भाषा को hurt करते है ।
  • author
    VP Singh
    12 अक्टूबर 2015
    नारी के दायित्वबोध के सहज रूप से बयां करती सुंदर कविता..जिसमें कब नादानी भरा बचपन चला जाता है..पता ही नहीं चलता..
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    piya parihar
    12 अक्टूबर 2015
    lines are so beautiful
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    12 अक्टूबर 2015
    राष्ट्र भाषा व मात्रा का अल्प ज्ञान दर्शाती है । नितांत सारहीन  व  अप्रासांगिक ।पेडो, पत्तो, जुल्फे इत्यादि शब्द राष्ट्र भाषा को hurt करते है ।
  • author
    VP Singh
    12 अक्टूबर 2015
    नारी के दायित्वबोध के सहज रूप से बयां करती सुंदर कविता..जिसमें कब नादानी भरा बचपन चला जाता है..पता ही नहीं चलता..