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न जाने क्यों...?

4.4
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सुबह जैसे ही घड़ी का अलार्म बजा, वह भुनभुनाया। मीठी नींद में खलल डालने वाले अलार्म को उठाकर फेंक देने की इच्छा हुई, मगर जैसे-तैसे उसने खुद को जब्त किया। चिढ़ते हुए उसके हाथ अलार्म घड़ी तक पहुंचे और ...

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लेखक के बारे में

शिक्षा - एम.ए.। पीएच. डी.-मुस्लिम महिलाओं की बदलती हुई स्थिति पर। जन्म - 27 जुलाई 1959 सम्प्रति - प्राध्यापक, मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के अधीन इंदौर में पदस्थ। प्राध्यापकीय अनुभव - 1985 से सतत। तीस वर्ष। सम्मान-पुरस्कार- -केन्द्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा फिल्म स्क्रिप्ट "इस बार बरसात में" पर राष्ट्रीय पुरस्कार, वर्ष 1993. -केन्द्रीय गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा "सामाजिक चेतना और विकास के संदर्भ में पुलिस की भूमिका का उद्भव" पुस्तक पर पं. गोविन्दवल्लभ पंत पुरस्कार, वर्ष 1993. -सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा "कटघरे में पीडि़त" पुस्तक पर भारतेन्दु हरिश्चंद्र पुरस्कार, वर्ष 1995. -संसदीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा "राष्ट्रीय एकता और अखंडता: बंद द्वार पर दस्तक" पुस्तक पर पं. मोतीलाल नेहरू पुरस्कार, वर्ष 1995. -विधानसभा सचिवालय, मध्यप्रदेश द्वारा भारत में संवैधानिक समन्वय और व्यावहारिक विघटन" पुस्तक पर डा. भीमराव आम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार, वर्ष 1995. -उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा नवसाक्षर साहित्य लेखन के लिए पुस्तकाएं "निश्चय", "सुबह का भूला", "साहसी कमला", "गोपीनाथ की भूल", साहब नहीं आए", "हरियाली के सपने", "छोटी-छोटी बातें", "नादानी" व "शिकायत की चिट्ठी" पर राष्ट्रीय पुरस्कार, वर्ष 1995, 1997,1999 व 2002. -आकाशवाणी महानिदेशालय, नई दिल्ली द्वारा रेडियो रूपक "कहां चली गई हमारी बेटियां" पर राष्ट्रीय पुरस्कार, वर्ष 1995. -राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंघान व प्रशिक्षण परिषद् (एन.सी.ई.आर.टी.),नई दिल्ली द्वारा "बीज का सफर" पुस्तिका पर बाल साहित्य का राष्ट्रीय पुरस्कार, वर्ष 1995. -चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट,नई दिल्ली द्वारा "व्यक्तित्व विकास और योग" पुस्तक पर राष्ट्रीय पुरस्कार,वर्ष 1995. -महामहिम राज्यपाल मध्यप्रदेश द्वारा उत्कृष्ट लेखकीय योगदान के लिए सम्मानित, वर्ष 1997. -सहस्त्राब्दि विश्व हिंदी सम्मेलन 2000 में उत्कृष्ट रचनात्मक योगदान ( हिंदी ) सम्मान. -मानव संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पुस्तिका "बहूरानी" पर राष्ट्रीय पुरस्कार, वर्ष 2002. -उत्कृष्ट लेखकीय योगदान के लिए माधवराव सिंधिया प्रतिष्ठा सम्मान, वर्ष 2003. -केन्द्रीय गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा "खंडित होते पुलिस के मानवाधिकार" पुस्तक पर पं. गोविन्दवल्लभ पंत पुरस्कार, वर्ष 2005. -मध्यप्रदेश जनसम्पर्क विभाग द्वारा स्वर्ण जयंती कहानी "धरती की डिबिया" पर पुरस्कार, वर्ष 2007. -मानव संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पुस्तिका "बापू की यात्रा" पर राष्ट्रीय पुरस्कार, वर्ष 2008. -अखिल भारतीय विद्वत् परिषद् वाराणसी द्वारा उपन्यास "भूभल" पर कादम्बरी पुरस्कार, वर्ष 2011. -साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश द्वारा उपन्यास "भूभल" पर बालकृष्ण शर्मा "नवीन" प्रादेशिक पुरस्कार, वर्ष 2011. -साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश द्वारा उपन्यास "नतोहम्" पर अखिल भारतीय राजा वीर सिंह देव पुरस्कार,वर्ष 2012. पाठ्यक्रम में- -"धरती की डिबिया में" कहानी गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में। -"नतोहम्" उपन्यास अटलबिहारी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल के स्नातक पाठ्यक्रम में शामिल। प्रकाशित कृतियां - उपन्यास- -भूभल (पुरस्कृत) -नतोहम् (पुरस्कृत व अटलबिहारी हिंदी विश्विद्यालय, भोपाल के स्नातक पाठ्यक्रम में ) कहानी संग्रह- -अच्छा हुआ मुझे शकील से प्यार नहीं हुआ -धरती की डिबिया (संग्रह की कुछ कहानियां भारतीय भाषाओं में अनूदित) स्त्री विमर्श- -कटघरे में पीडि़त (पुरस्कृत) -अस्मिता की अग्निपरीक्षा (पुरस्कृत और मराठी में अनूदित) सामाजिक विमर्श- -भारत में संवैधानिक समन्वय और व्यावहारिक विघटन (पुरस्कृत) -सामाजिक चेतना और विकास के परिप्रेक्ष्य में पुलिस की भूमिका का उद्भव (पुरस्कृत) -पुलिस और समाज (पुरस्कृत) -मानवाधिकार संरक्षण एवं पुलिस किशोर साहित्य- -लालाजी ने पकड़े कान (किशोर उपन्यास) -व्यक्तित्व विकास और योग (पुरस्कृत) अंग्रेजी में अनूदित बाल साहित्य--बीज का सफर (पुरस्कृत) मराठी भाषा में अनूदित -चैरंगी पतंग -बूंद-बूंद से सागर -पाली का घोड़ा -पीतल का पतीला -क्यों...? (अंग्रेजी व अन्य कई भारतीय भाषाओं में अनूदित) नवसाक्षर साहित्य- -किसी से न कहना -काम का बंटवारा -मुसकान -घर लौट चलो (कई भारतीय भाषाओं में अनूदित) -सांझ सबेरा (कई भारतीय भाषाओं में अनूदित) -मूमल महेन्द्र की प्रेम कथा -निश्चय (पुरस्कृत) -सुबह का भूला (पुरस्कृत) -साहसी कमला (पुरस्कृत) -गोपीनाथ की भूल (पुरस्कृत) -साहब नहीं आए (पुरस्कृत) -हरियाली के सपने (पुरस्कृत) -छोटी-छोटी बातें (पुरस्कृत) -नादानी" (पुरस्कृत) -शिकायत की चिट्ठी (पुरस्कृत) -बहूरानी (पुरस्कृत) -बापू की यात्रा (पुरस्कृत) -हमारा राज है -टेढ़ी उंगली का घी -जरा सम्हल के -हम किसी से कम नहीं -नीलोफर का दुख -यह है बुरी बीमारी -गुलाब का फूल -राखी का हक नाटक - -सच्चा उपहार अन्य- -यूनीसेफ, यूनेस्को, नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया, एन.सी.ई.आर.टी., राज्य संसाधन केंद्र उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश, आदि के द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यशालाओं में भागीदारी। -साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित कई राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में मुख्य वक्ता, मुख्य अतिथि, अध्यक्ष के रूप में भागीदारी। -मानवाधिकारों के विभिन्न पहलुओं एवं उनमें पुलिस की भूमिका पर केंद्र सरकार, मध्यप्रदेश व राजस्थान के विभिन्न पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में अनेक व्याख्यान। -मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग इंदौर नेट वर्क की पूर्व सदस्य। -संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन की पुस्तक चयन समिति की पूर्व सदस्य। -श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति, इंदौर (सौ वर्षों से हिंदी की सेवा व प्रचार में संलग्न प्रतिष्ठित संस्था) में मंत्री। -श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति, इंदौर से प्रकाशित हिंदी पत्रिका में तीन वर्ष तक सम्पादक मंडल में। -भारत सरकार के कारपोरेट मंत्रालय की राजभाषा समिति की सदस्य। -आपकी कई पुस्तकों का विभिन्न भारतीय भाषाओं व अंग्रेजी में अनुवाद।

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    शिप्पी नारंग
    06 ஜூன் 2016
    एक प्यारी सी मुस्कान क्या असर दिखाती है इसका वर्णन बहुत ही असरदार है.
  • author
    Ravindra Narayan Pahalwan
    16 நவம்பர் 2018
    न जाने क्यों ? रचना मुझे अच्छी लगी / रचना में लयबध्दता है, पढ़ने में रोचकता बनी रहती है / दैनिक जीवन की घटनाओं को बहुत ही सुंदर तरीक़े से प्रस्तुत किया है / रचनाकर की कलम को प्रणाम...
  • author
    31 மார்ச் 2020
    मुस्कान का प्रत्युत्तर अवश्य प्राप्त होता है यह मैंने स्वयं अनुभव कर रखा है। परंतु मुस्कान से जीवन परिवर्तन भी हो सकता है। इस वाक्य को आपने इस रचना में जीवंत कर दिखाया है....... डॉ मीनाक्षी स्वामी जी बहुत ही सुंदर शब्दों के संयोजन द्वारा आपने इस रचना को प्रस्तुत किया है
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    शिप्पी नारंग
    06 ஜூன் 2016
    एक प्यारी सी मुस्कान क्या असर दिखाती है इसका वर्णन बहुत ही असरदार है.
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    Ravindra Narayan Pahalwan
    16 நவம்பர் 2018
    न जाने क्यों ? रचना मुझे अच्छी लगी / रचना में लयबध्दता है, पढ़ने में रोचकता बनी रहती है / दैनिक जीवन की घटनाओं को बहुत ही सुंदर तरीक़े से प्रस्तुत किया है / रचनाकर की कलम को प्रणाम...
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    31 மார்ச் 2020
    मुस्कान का प्रत्युत्तर अवश्य प्राप्त होता है यह मैंने स्वयं अनुभव कर रखा है। परंतु मुस्कान से जीवन परिवर्तन भी हो सकता है। इस वाक्य को आपने इस रचना में जीवंत कर दिखाया है....... डॉ मीनाक्षी स्वामी जी बहुत ही सुंदर शब्दों के संयोजन द्वारा आपने इस रचना को प्रस्तुत किया है