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मुंशी प्रेमचंद की प्रासंगिकता

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31 जुलाई जन्म दिवस पर विशेष मुंशी प्रेमचंद की प्रासंगिकता राजीव आनंद 31 जुलाई 1880 को बनारस के निकट लमही ग्राम में अजायब राय के घर जन्में धनपत राय आठ बर्ष के उम्र में ही अपनी माॅं को खो दिया। पिता ने दूसरा ब्याह कर लिया, सौतेली माॅं क्या होती है इसका कटु अनुभव उन्हें बचपन से ही था. अपनी माॅं के याद में धनपत राय तड़प-तड़प कर बड़े हुए। समाजिक कुरीतियों के प्रति धनपत राय का विद्रोही स्वभाव की एक बानगी थी उनका षिवरानी नामक एक विधवा से दूसरा विवाह तब करना जब समाज में विधवा विवाह का विरोध चंहुओर होता ...

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लेखक के बारे में
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राजीव आनंद
समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    शिवानी खत्री
    09 मई 2018
    Nice👌
  • author
    02 जून 2019
    माननीय श्री राजीव आनन्द जी उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की पुन्यतिथि पर आपने बहुत ही उत्तम एवं कम शब्दों में भावपूर्ण श्रृद्धांजलि अर्पित की है ।निसंदेह आप मुंशी प्रेमचंद साहित्य के बहुत बङे ज्ञाता तथा मर्मज्ञ हैं । मैं भी उनका एक अनुयायी हूं तथा उनके साहित्य से प्रेरित होकर कुछ अक्षर जोङने का प्रयास करता हूं। यदि आप सचमुच ही " गोदान " पढ चुके हैं,तो " गोदान के बाद " तथा " मंगलसूत्र का वरदान " भी अवश्य पढ देखें।मैं आपकी निष्पक्ष समीक्षा की प्रतीक्षा करूंगा। बहुत-बहुत धन्यवाद। पुनश्चः आपके लेखन मे जहाँ कहीं भी " श " का प्रयोग हुआ है वहाँ " ष " ही गल्ती से टाईप हुआ है ।कृपया अन्यथा न लें।
  • author
    कुन्दन गुप्ता
    11 जुलाई 2018
    प्रेमचंद के अन्य कृत्यों की प्रासंगिकता पर भी विचार किया जाना चाहिए था।
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    शिवानी खत्री
    09 मई 2018
    Nice👌
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    02 जून 2019
    माननीय श्री राजीव आनन्द जी उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की पुन्यतिथि पर आपने बहुत ही उत्तम एवं कम शब्दों में भावपूर्ण श्रृद्धांजलि अर्पित की है ।निसंदेह आप मुंशी प्रेमचंद साहित्य के बहुत बङे ज्ञाता तथा मर्मज्ञ हैं । मैं भी उनका एक अनुयायी हूं तथा उनके साहित्य से प्रेरित होकर कुछ अक्षर जोङने का प्रयास करता हूं। यदि आप सचमुच ही " गोदान " पढ चुके हैं,तो " गोदान के बाद " तथा " मंगलसूत्र का वरदान " भी अवश्य पढ देखें।मैं आपकी निष्पक्ष समीक्षा की प्रतीक्षा करूंगा। बहुत-बहुत धन्यवाद। पुनश्चः आपके लेखन मे जहाँ कहीं भी " श " का प्रयोग हुआ है वहाँ " ष " ही गल्ती से टाईप हुआ है ।कृपया अन्यथा न लें।
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    कुन्दन गुप्ता
    11 जुलाई 2018
    प्रेमचंद के अन्य कृत्यों की प्रासंगिकता पर भी विचार किया जाना चाहिए था।