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मुक्तक ""मिट्टी का खिलौना मिट्टी में मिल गया रे इंसान ""

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मिट्टी का खिलौना मिट्टी में मिल जायेगा, आया था जैसे वैसे ही चला जायेगा, कर कर्मो को अच्छे फिर चले जाना, फिर कहाँ मिलेगा मौका यहाँ आयेगा।।१।। जब आया था यहाँ बहुत गिड़गिड़ाया था, प्रकृति को बहुत लालच ...

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लेखक के बारे में
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Harmankumar Baghel

मैं हरमन कुमार बघेल व्याख्याता शास.क.उ.मा.वि.आरंग रायपुर छ.ग. आज के परिवेश में सहज-सरल समझने योग्य मेरी मुक्त कवितायें आप सभी श्रेष्ठ जनों को पसंद आ रही है तो मेरी रचना एक बार अवश्य पढ़े व अपना आशीर्वाद अवश्य बनायें रखें।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Singhh Pams "Singhh Pams"
    11 अगस्त 2022
    बहुत ही अच्छा लिखा है 👏🏽👏🏽👏🏽👏🏽🤩🙏🏻🙏🏻👌👌👌🌹🌹🌷🌷🌷🌷🌷💐💐💐
  • author
    Brahmwati Sharma
    11 अगस्त 2022
    बेहतरीन बेहतरीन बेहतरीन अभिव्यक्ति एवं भावनाये
  • author
    mehar singh
    12 अगस्त 2022
    बहुत सुन्दर 👌👌
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    Singhh Pams "Singhh Pams"
    11 अगस्त 2022
    बहुत ही अच्छा लिखा है 👏🏽👏🏽👏🏽👏🏽🤩🙏🏻🙏🏻👌👌👌🌹🌹🌷🌷🌷🌷🌷💐💐💐
  • author
    Brahmwati Sharma
    11 अगस्त 2022
    बेहतरीन बेहतरीन बेहतरीन अभिव्यक्ति एवं भावनाये
  • author
    mehar singh
    12 अगस्त 2022
    बहुत सुन्दर 👌👌