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मुहाफ़िज़

4.2
1664

. ................सिराज फ़रूक़ी,पनवेल हनुमान निहायत ही शरीफ आदमी था. न किसी से कुछ लेना न देना अपने काम सेकाम.वह आॅटो रिक्शा चलाता, उससे जो भी आमदनी होती, उसमें से 50रूपये की दारू पीता और 50 रूपये ...

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लेखक के बारे में
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Siraj Farooqui

कहानीकार, गीतकार और पत्रकार

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Asha Kubba
    20 ಏಪ್ರಿಲ್ 2019
    Kahani bahut achchi लगी.insaaniyat aaj bhi zinda hai. Lekhak ko badhai.
  • author
    01 ಫೆಬ್ರವರಿ 2019
    क्या खूब लिखा है आपने।लाजवाब।
  • author
    vipin jain
    03 ಡಿಸೆಂಬರ್ 2018
    Kash sabhi itne achhe ho
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    Asha Kubba
    20 ಏಪ್ರಿಲ್ 2019
    Kahani bahut achchi लगी.insaaniyat aaj bhi zinda hai. Lekhak ko badhai.
  • author
    01 ಫೆಬ್ರವರಿ 2019
    क्या खूब लिखा है आपने।लाजवाब।
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    vipin jain
    03 ಡಿಸೆಂಬರ್ 2018
    Kash sabhi itne achhe ho