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मुबारक हो तुम्हें

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मुबारक हो तुम्हें मुझ से दिल लगाने के लिए मुझे यूं तड़पता छोड़ जाने के लिए, मेरे दिल को कुरेद कर छलनी करने के लिए हाथ थाम कर बीच राहों में छोड़ जाने के लिए, बदकिस्मती हूं जो तेरा प्यार ना पाया ...

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लेखक के बारे में
author
Diwakar Kumar

इंसानियत हैसियत से बढ़कर होती है, हम चाहे जितने भी बड़े हो जाएं पर अपनी इंसानियत को कभी ना भूले।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Seema Bano
    13 मार्च 2021
    बहुत ही खूबसूरती से दिल के जज़्बातों को उकेरा है🙏 बहुत सुन्दर प्रस्तुति👌
  • author
    Aditi Tandon
    16 मार्च 2021
    अच्छा लिखा है आपने 💐💐💐
  • author
    छाया
    14 मार्च 2021
    wah, 👏👏👏
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  • author
    Seema Bano
    13 मार्च 2021
    बहुत ही खूबसूरती से दिल के जज़्बातों को उकेरा है🙏 बहुत सुन्दर प्रस्तुति👌
  • author
    Aditi Tandon
    16 मार्च 2021
    अच्छा लिखा है आपने 💐💐💐
  • author
    छाया
    14 मार्च 2021
    wah, 👏👏👏