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!!!माँ!!!

4.8
281

ज़िन्दगी ने ऐसे मोड़ पे लाके खड़ा कर दिया है की क्या बताऊ यारो ।। माँ की आँखों में देखता हु तो ममता नजर आती है और तब लगता है सब कुछ भुला दु और बस लग जाऊ माँ के करम -ए- शरण ।।।। और जब दीदार यार का ...

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लेखक के बारे में
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गोपाल यादव

लेखन..... ये वो काम है जिससे मैं कभी ऊब नही सकता ।। ये मुझे हमेशा ऊर्जा देता है।। दुनिया को देखने का नया नज़रिया देता है।।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Surbhi Sharma
    13 جولائی 2018
    deeply thinking, what a wonderful poetry.
  • author
    Raaj yadav
    17 مئی 2018
    बहोत सुंदर रचना दिल जीत लिया आपने गोपाल जी
  • author
    विद्या शर्मा
    27 اپریل 2018
    ma ki Mamta ka sunder Barnan..
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  • author
    Surbhi Sharma
    13 جولائی 2018
    deeply thinking, what a wonderful poetry.
  • author
    Raaj yadav
    17 مئی 2018
    बहोत सुंदर रचना दिल जीत लिया आपने गोपाल जी
  • author
    विद्या शर्मा
    27 اپریل 2018
    ma ki Mamta ka sunder Barnan..