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मोक्ष

4.3
3807

आज 21 वां दिन था उसके उपवास का । उसकी जिह्वा भी अब शायद अन्न-जल की उम्मीद छोड़ चुकी थी । शरीर हड्डियों का ढांचा मात्र रह गया था। तन पर मैले कुचैले वस्त्र, बाल और दाढ़ी बिखरे हुए मटमैले हो चुके थे ...

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लेखक के बारे में
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Artee priyadarshini

writer and publisher in Prakhar goonj Publication शिक्षा :---- हिन्दी से स्नातकोत्तर, DCH (Diploma in creative writing in Hindi) 

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    अजय अमिताभ सुमन
    07 दिसम्बर 2018
    ये प्रतिलिपी का सौभाग्य है कि इतनी खुबसूरत कहानी आपके द्वारा शेयर की गई है। यदि संभव होता तो मैं 20 स्टार देता।
  • author
    Rita Islam
    13 नवम्बर 2018
    अच्छी कहानी।
  • author
    Maya Saini
    16 अप्रैल 2022
    niswarth seva hi saccha mokhs hae .Radhey Radhey Jai shri Radhey Krishna ji 🙏🌹🙏
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    अजय अमिताभ सुमन
    07 दिसम्बर 2018
    ये प्रतिलिपी का सौभाग्य है कि इतनी खुबसूरत कहानी आपके द्वारा शेयर की गई है। यदि संभव होता तो मैं 20 स्टार देता।
  • author
    Rita Islam
    13 नवम्बर 2018
    अच्छी कहानी।
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    Maya Saini
    16 अप्रैल 2022
    niswarth seva hi saccha mokhs hae .Radhey Radhey Jai shri Radhey Krishna ji 🙏🌹🙏