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मोहब्बत का दर्द

4.2
748

थे हम दर्द में, कोई सहारा मिल गया होता बीच भवर में काश, कोई किनारा मिल गया होता! जीने की खत्म हो गयी तमन्ना, कोई सपना मिल गया होता यु तो बहुत भीड़ है दुनिया में, काश कोई अपना मिल गया होता! हम तो ऐसे...

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समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    sagar singh
    25 अगस्त 2018
    गज़ब यार गज़ब
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    13 नवम्बर 2022
    बहुत ही सुन्दर । हार्दिक साधुवाद
  • author
    Rohit Chauhan
    15 अप्रैल 2019
    बहुत अच्छी कविता लिखी है 👌👌❤️❤️
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  • author
    sagar singh
    25 अगस्त 2018
    गज़ब यार गज़ब
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    13 नवम्बर 2022
    बहुत ही सुन्दर । हार्दिक साधुवाद
  • author
    Rohit Chauhan
    15 अप्रैल 2019
    बहुत अच्छी कविता लिखी है 👌👌❤️❤️