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मिट्टी की महक 🌺🌺

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मिट्टी की सोंधी सी महक ने एक उमंग सी जगा दी बारिशों ने भी सपनोँ के संग एक हवा दी 🌺 मिट्टी की सोंधी सी महक की हर बात निराली है रिश्ता जब से है जब चलना भी ना आता था नादानी इतनी कि जब इसे ही खा...

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लेखक के बारे में
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Deepa singh ❤️ Gautam

मेरे मेहनत के समय धूप का साथ मिला। अगर छांव होती तब में कब की सो गई होती । 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌷 💗💗💗🥀🥀🥀🥀🥀🥀

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Mohan Lal
    17 दिसम्बर 2021
    वाहजी आदरणीय साहिबा, बहुत ही सारगर्भित अभिव्यक्ति की है। वर्षा के बाद जमीन से उठी हुई सोंधी खुश्बू मन को बहुत ही भाती है, इसी तरह इंसान में व्याप्त इंसानियत की खुशबू आस पड़ोस के सभी व्यक्तियों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेती है। अतः "कुछ भी बनें मुबारक है, पर पहले इंसान बनें"। आपजी भी मेरे सारे ही लेख पढ़कर समुचित समीक्षा अवश्य करें साहिबा।
  • author
    Yogesh Kumar Maurya
    17 दिसम्बर 2021
    लाजवाब अभिव्यक्ति✨✨✨ गुरु मित्र जी मिट्टी का स्वाद हमने चखा है...😇😇
  • author
    🧁🇰ꪖ𝘃𝚢ã🧁
    17 दिसम्बर 2021
    behtarin likha aapne shandar rachana 👌👌
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    Mohan Lal
    17 दिसम्बर 2021
    वाहजी आदरणीय साहिबा, बहुत ही सारगर्भित अभिव्यक्ति की है। वर्षा के बाद जमीन से उठी हुई सोंधी खुश्बू मन को बहुत ही भाती है, इसी तरह इंसान में व्याप्त इंसानियत की खुशबू आस पड़ोस के सभी व्यक्तियों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेती है। अतः "कुछ भी बनें मुबारक है, पर पहले इंसान बनें"। आपजी भी मेरे सारे ही लेख पढ़कर समुचित समीक्षा अवश्य करें साहिबा।
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    Yogesh Kumar Maurya
    17 दिसम्बर 2021
    लाजवाब अभिव्यक्ति✨✨✨ गुरु मित्र जी मिट्टी का स्वाद हमने चखा है...😇😇
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    🧁🇰ꪖ𝘃𝚢ã🧁
    17 दिसम्बर 2021
    behtarin likha aapne shandar rachana 👌👌