मिट्टी की सोंधी सी महक ने एक उमंग सी जगा दी बारिशों ने भी सपनोँ के संग एक हवा दी 🌺 मिट्टी की सोंधी सी महक की हर बात निराली है रिश्ता जब से है जब चलना भी ना आता था नादानी इतनी कि जब इसे ही खा...
वाहजी आदरणीय साहिबा, बहुत ही सारगर्भित अभिव्यक्ति की है। वर्षा के बाद जमीन से उठी हुई सोंधी खुश्बू मन को बहुत ही भाती है, इसी तरह इंसान में व्याप्त इंसानियत की खुशबू आस पड़ोस के सभी व्यक्तियों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेती है। अतः "कुछ भी बनें मुबारक है, पर पहले इंसान बनें"।
आपजी भी मेरे सारे ही लेख पढ़कर समुचित समीक्षा अवश्य करें साहिबा।
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